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समय आने पर शांति से जो अपनी बात व्यक्त करें, असल में बुद्धिमान वही है : - साध्वी शुभंकरा श्रीजी

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रायपुर - हमारे भूतकाल की कथा ही हमारी आज की व्यथा है। जिन लोगों ने इतिहास रचा है, आज उन्हें ही याद किया जाता है। हमारे इस दुनिया से जाने के बाद हमें कोई याद करें, ऐसी मंशा मत रखना। भगवान ने कभी नहीं कहा कि मेरा स्मरण करना फिर भी लोग उन्हें हर समय याद करते है। जिनका जीवन सपाट है, कोई उतार-चढ़ाव नहीं है उन्हें कोई उंगलियों में नहीं गिनता। एक सफल ड्राईवर वही है जो आपको ऊंचे-नीची पहाड़ी और घाटियों से पार कराकर आपके गंतव्य स्थान तक सही-सलामत पहुंचा दे। भले ही आप बाजू में बैठकर एक झपकी ले लो, उसकी पीठ थपथपा लो लेकिन योग्य वह है, आप नहीं। गाड़ी में बैठे-बैठे आप उसे दिशा निर्देश तो दे सकते हो लेकिन आप उसके जैसी गाड़ी नहीं चला सकते हैं। आपको लगता है कि आप उसे दिशा निर्देश देंगे तो आप बुद्धिमान कहलाएंगे लेकिन आप बुद्धू होंगे क्योंकि पूरी मेहनत तो वह कर रहा है और दिमाग लगाकर वह गाड़ी चला रहा है। असल में, समय आने पर जो चर्चा करें और शांति से अपनी बात व्यक्त करें वही बुद्धिमान है। बिना वजह अपनी राय रखना उचित नहीं होता, यह केवल समय की बर्बादी है। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान मंगलवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही। उतार-चढ़ाव सभी के जीवन में रहता है। एक बार की बात है एक बच्चा अपनी मेहनत से एक रुपए कमाता है। फिर वह उसका आकलन करता है कि मैं जब गर्भ में था तो पिता की मृत्यु हो गई और मां ने मुझे पाला-पोसा और पढ़ाया-लिखाया और मुझे इस काबिल बनाया कि मैं कुछ कमा सकूं और आज मैंने 1 रुपए कमा लिया है तो उससे मां के लिए कुछ लेकर जाऊंगा। इस 1 रुपए से मिलेगा क्या, यह सोचते हुए उसने निर्णय लिया कि मां ने मेरे जीवन को खुशबुओं से भर दिया है तो मैं उनके लिए फूल लेकर जाता हूं। वह फूलों की दुकान जाता है और दुकानदार से कहता है कि मुझे 1 रुपए का फूल दो। दुकानदार कहता है कि इतने में तो कोई भी फूल नहीं मिल पाएगा। यह सुनकर वह बच्चा उदास हो जाता है और उसके चेहरे का भाव बदल जाता है। थोड़ी देर में ही दुकानदार समझ जाता है कि बच्चों के मन में उमंग है और उसे कहते हैं कि क्या बात है। बच्चा अपनी पूरी व्यथा उसे दुकानदार को बताता है तो दुकानदार अपना दुकान से एक बहुत अच्छा गुलदस्ता निकाल कर सामने रख देता है। अब लगातार ग्राहक आते और उस गुलदस्ते का मूल्य पूछते तो दुकानदार कहता कि यह गुलदस्ता बिक चुका है। करीब 35-40 ग्राहकों ने उस गुलदस्ते का मूल्य पूछा और सबको यही जवाब मिला कि यह बिक चुका है। करीब 2 घंटे के बाद उसे दुकानदार के सारे फूल बिक जाते हैं केवल वही गुलदस्ता रह जाता है। अब उस गुलदस्ते को दुकानदार उस बच्चे को 1 रुपए में बेच देता है। बच्चा गुलदस्ता लेकर वहां से चला जाता है और यह सारा दृश्य दुकानदार की पत्नी दिखती रहती है और फिर आकर रहती है कि यह गुलदस्ता 500 रूपए में बिक सकता था और लोगों ने इसकी काफी पूछ परख भी की लेकिन आपने 1 रुपए में इस महंगे गुलदस्ते को उस बच्चों को बेच दिया, यह कैसा व्यापार है। दुकानदार कहता है कि तुम नहीं समझोगे अभी तो हमारी शादी को केवल 10 साल हुए हैं और तुम 10 साल से मेरे साथ रह रही हो लेकिन तुमने मेरा भूतकाल नहीं देखा है। यह जो बच्चा था यही मेरा भूतकाल था। मैंने अपने जीवन में ऐसे ही समय काटा है तो मैं उसे बच्चों की व्यथा समझ सकता हूं। जब हम भूतकाल की कथा देखते हैं तो हमें यह इस मानव जीवन में ही विचार करना है कि हमें उसे विराम देना है या फिर इस कुचक्र को ऐसे ही चलने देना है। मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।

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