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परमात्मा की भक्ति ऐसी करो कि उनके गुण और हमारे दुर्गाेंणों का हमें भाव हो जाए : - साध्वी शुभंकरा श्रीजी

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रायपुर - एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान गुरूवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि मंदिर ट्रस्ट को भी दीवारों पर पोस्टर लगाना पड़ता है- मंदिर में मोबाइल साइलेंट रखें या स्विच ऑफ करें। हद तो तब हो जाती है जब इसे पढ़ने के बाद भी लोग निर्देश का पालन नहीं करते हैं। मंदिर के अंदर पूजा अनुष्ठान के दौरान भी लोग फोन उठाकर बात करने को ज्यादा महत्व देते हैं, वह भूल जाते हैं कि वह कहां बैठे हैं और क्या कर रहे हैं। प्रभु से ज्यादा महत्व हमें फोन को देते हैं ताकि कोई लाभ का सौदा न छूट जाए। विचार कीजिए कि जब प्रभु आपको महत्व देना कम कर देंगे तब आपकी क्या स्थिति होगी। व्यक्ति का जब समय खराब रहता है तो वह समय से मंदिर पहुंच जाता है और जब उसका भाग्य चरम पर होता है तो वह समय का आदर नहीं करता। उन्होंने आगे कहा कि हमें परमात्मा की ऐसी भक्ति करनी चाहिए जिससे कि उनके गुणों और हमारे दुर्गुणों का भाव हो जाए। हम वैसा नहीं कर पाते और हमारा जीवन चक्र ज्यों का त्यों चलता ही रहता है। जैसे भ्रमण अपनी रटन रटते हैं, वैसे ही हमें परमात्मा का रटन रटते-रटते परम आत्मा हो जाना है। हम ईश्वर की आज्ञा का पालन करेंगे तो हमारा कल्याण होगा, नहीं तो कब कौन सा एक्सीडेंट हो जाए, पता नहीं। हमें भाव भक्ति में लीन होकर परमात्मा का रटन करना है और परमात्मा पद की प्राप्ति करनी है। रक्षाबंधन के पर्व का महत्व बताते हुए साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई और बहन के प्यार एवं स्नेह का त्यौहार है, जो उनके बीच के रिश्ते को और मजबूत बनाता है। इस दिन बहनें, भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके भाग्योदय की कामना करती है और भाई उनकी रक्षा करने का वचन देता है। यह पर्व महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, अस्मिता के प्रति हम सभी को जागरूक और प्रतिबद्ध करता है। जिसके भाई बहन नहीं है उसके दिल पर क्या बीती होगी वह खुद ही जानता है। एक बार की बात है एक बच्ची अपने भाई को राखी बांधने वाली होती है। मां से वह राखी मांगती है लेकिन मां जो राखी उसे देती है वह उसे पसंद नहीं होती और वह कहती है कि मुझे अपने पसंद की राखी बांधनी है। ऐसा कहकर वह बाजार चली जाती है और राखी की दुकान पर जाकर कहती है कि मुझे यह राखी चाहिए, कितने की है। दुकानदार कहता है 10 रुपए की। बच्ची कहती है कि मेरे पास तो 5 रुपए है, 5 रुपए में यह राखी मुझे दे दो। बात पैसों की नहीं है राखी तो मैं ऐसे भी तुम्हें दे दूंगा लेकिन अभी बोहनी नहीं हुई है। बच्ची कुछ सोचने लगती है और दुकानदार की खाली कलाई देखकर एक राखी उठाकर उसे बांध देती है। दुकानदार का मन भर जाता है और उस बच्ची को वह उठा लेता है और कहता है तुम मेरी बहन हो। ऐसा कह कर वह उसे बगल में कपड़े की दुकान पर ले जाता है और कहता है कि तुम अपने मनपसंद के कपड़े ले लो। कपड़े दुकान वाले से भी वह कहता है कि इसे जो पसंद हो वह दे देना कीमत की कोई बात नहीं है क्योंकि यह मेरी बहन है। विचार कीजिए कि जो दुकानदार 5 रुपए के लिए नोंक-झोंक कर रहा था, वह अब अपनी बहन को उपहार देने के लिए कीमत की कोई चिंता नहीं कर रहा है। यह असल मायने में भाई बहन का प्यार है। मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।

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