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पानी को कितना भी पिलोए, मक्खन नहीं निकलेगा : - साध्वी शुभंकरा श्रीजी

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रायपुर - एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान गुरूवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि पानी को कितना पिलाेए मक्खन नहीं निकलेगा। वैसे ही कोई व्यक्ति किसी भाव को कितना भी पिलोए, सांसरिक सुख उसे नहीं मिल सकता। अब सवाल यह है कि सुख मिलेगा कहां, तो जान लीजिए कि सुख और आनंद आपके अंदर ही है। इन बातों को सार बताते हुए साध्वीजी ने कहा कि एक बार एक व्यक्ति क्रोध में आकर दूसरे व्यक्ति को बुरा-भला कह देता है। इस पर दूसरे व्यक्ति ने सोचा कि वह किसी और को यह कह रहा है और वह अपनी मस्ती में मगन था। वहीं पहले व्यक्ति के शब्दों से तीसरा व्यक्ति दुखी हो गया। उस बात को वह हमेशा सोचता रहता था और उसके मन में नकारात्मक भाव पैदा होने लगे। वहीं दूसरा व्यक्ति अब भी अपनी मस्ती में मगन था और यह बात वह भूल भी गया था। इससे हमें यह संदेश मिलता है कि सुख और दुख मान्यताओं के आधार से मिलता है। ठीक वैसे ही हम भगवान की वाणी को नहीं समझते या फिर समझने की कोशिश नहीं करते। हम ऐसा ही सोचते है कि वे दूसरे को बोल रहे है और ऐसा सोच कर हम अपने आप को ही ठगते है। साध्वी जी कहती हैं कि दिन में केवल एक बार परमात्मा को किया हुआ प्रणाम आपके जीवन का कल्याण कर सकता है। बहुत लोगों को ऐसा करने में शर्म आती है पर कर्म को शर्म नहीं आती है। कुछ लोग तो पैसे वालों को रोज प्रणाम करते हैं, बड़े लोगों को रोज नमस्कार करते हैं, जो कभी उनके काम नहीं आने वाले हैं। आपके जीवन का जो बेड़ा पार करने वाले हैं, संसार से आपको पार करने वाले हैं ऐसे महाप्रभु को आप प्रणाम नहीं करते हो। जबकि आपको हर दिन मंदिर में जाकर परमात्मा को प्रणाम करना है और मंदिर की परिक्रमा भी लगानी है। हमें कर्म सिद्धांत का अध्ययन करना है क्योंकि पढ़ना और समझना केवल मनुष्य जीवन में ही संभव है यह और किसी भव में कोई नहीं कर सकता है। आत्मा अकेले ही कम नहीं बढ़ सकती है उसके साथ कर्म भी मिक्स होता है लेकिन फिक्स नहीं होता। आपके घर में धूल बहुत आती है तो क्या आप पूरे धूल को खत्म कर सकते हैं, यह कभी संभव ही नहीं है। आत्मा अपने आप में शुद्ध है यह तो राग और द्वेष से घिरी हुई है जिसकी वजह से कर्म बंधते है। यह कर्म हमें दिखाई नहीं देते पर वह स्टॉक में जमा होते जाते हैं। दूध में पानी जरुर मिलाया जाता है पर दोनों एक रुप नहीं हो सकते हैं। आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं उन्होंने हंस की चोंच लगाई है जो दूध का दूध और पानी का पानी कर सकते हैं। वैसे ही कर्मों के लिए उपयुक्त कोई विषनाशक दवाई है तो वह सत्संग और जिनवाणी ही है। मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।

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