रायपुर - हम सबको सभी चीजें पूर्ण चाहिए। कोई चीज अधूरी नहीं चाहिए, वैसे ही हम कोई काम अधूरा नहीं करना चाहते है। आप पूरा पाना चाहते हो, पर इस दुनिया में कोई चीज पूरी नहीं मिल सकती है। क्योंकि संसार का मतलब ही अधूरा हाेता है। यह संसार का नियम ही है कि हमें जो मिलता है, अधूरा ही मिलता है। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान रविवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही। साध्वीजी कहती हैं कि संसार का शाब्दिक अर्थ ही संसरणशील होता है। संसरणशील का मतलब होता है चलते जाना। आप अभी जहां है, कल आप भी वहां नहीं रहोगे। आज आप नीचे हो कल ऊपर जाओगे और आज अगर आप ऊपर हो तो कल नीचे भी आओगे। इस संसार में अगर हम भाग-दौड़ करते रहेंगे और संसार से ही सांसरिक चीजें मांगते रहेंगे तो हमको ज्यादा कुछ मिलने वाला नहीं है। परमात्मा की वाणी है कि पराई वस्तु के निमित्त से प्राप्त हमारी पूर्णता ठीक वैसी ही है कि जैसे किसी से उधारी मांग कर कोई आभूषण पहनने से सुख मिलता है। इससे जो अनुभव मिलता है वह क्षणिक सुख है। इस दुनिया में केवल आत्मा हमारी खुद की है, जबकि शरीर भी खुद का नहीं है। एक भी चीज खुद की कभी नहीं हो सकती है। सब पराया है। शरीर भी एक दिन साथ हमारा साथ छोड़ देगा।
आग को पहचान लिया पर दुनिया को नहीं -
साध्वीजी ने कहा कि पूजा-पाठ से बड़ी-बड़ी बला टल जाती है। संसार एक बला है और प्रवचन कला है। साधु-संतों के पास कोई कला हाेती है, जिसे सीखने लोग उनका पास जाते है, उनका प्रवचन सुनते है। आपको कुछ सीखना होता है तो आप घर से निकलकर बाहर जाते हो। घर में बैठे-बैठे ऑनलाइन डिलीवरी के अलावा कुछ नहीं मिल सकता है। भगवान महावीर की स्तुति में भी यह संदेश है कि यह दुनिया एक दावानल है। आग तो फिर भी आसानी से बुझ जाती है लेकिन दावानल नहीं बुझ सकती है। जब आप आग को समझ जाए तो उसे छूने की गलती आप नहीं कर सकते हो। ऐसा नहीं हो सकता कि आपने बहुत दिनों तक आग नहीं देखा तो उसे भूल जाओगे। आग दिखे और हम हाथ डाल दे ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि आग को हमने समझ लिया है। विडंबना की बात है कि हमने दुनिया को अब तक नहीं समझा है। यह वो आग है, जो किसी को भी नहीं छोड़ती है। मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।