श्री विजयवाड़ा जैन संघ में चल रहा पूज्य गुरु भगवंत गुणहंस विजयजी मसा चौमासा प्रारंभ होकर अभी तक एक रुपए का भी खर्चा नहीं एक रुपए की भी बोली नही हुई है। जितनी भी बोलिया हुई है, वो सभी आराधना की बोली हुई जिसने ज्यादा नियम लिए उसको चढ़ावा मिला। व्याख्यान दिन में 8 बार चलते है। मुख्य व्याख्यान सुबह 9.15 से आरंभ हो जाते है 9.20 तक लगभग 1200 की संख्या हो जाती है। ठीक 9.20 को व्याख्यान हाल को ताला लगा देते है कोई भी हो उसके बाद न कोई आ सकता है न कोई जा सकता है। स्वयं अध्यक्ष एवं मंत्री भी अगर बाद में आए है, तो पीछे ही बैठेंगे लोगो के बीच से आगे कोई नही आ सकता है। ऐसी व्यवस्था सम्पूर्ण देश में किसी भी चौमासे में पहली बार हो रही है। संघ में कोई भोजन व्यवस्था नही है, गुरु भगवंत के मेहमान भी संघ के श्रावको के घर में ठहरते है। गुरु भगवंत संघ का पानी भी नहीं वापर्ते है, वो भी लोगो के घर से लाते है। ऐसे गुरु भगवंत जो ज्ञान का खजाना है, जिन्होंने कई कई आचार्य भगवंत को भी पढ़ाया है, जिनकी दीक्षा को 25-30 वर्ष हो गए है, जिनमे आचार्य भगवंत जितनी श्रेष्ठता गुणवत्ता हो वो गुरु भगवंत सिर्फ मुनिराज है एक भी पद धारण नही किया है। ऐसा लगता है जैसे चौथे आरे के गुरु भगवंत इस पंचम काल में आ गए हो। धन्य धन्य गुरुवरा धन्य धन्य जिन शासन।