रायपुर - जैसा भाव वैसा पाव, जैसे आपका भाव रहेगा आपका वैसा प्रभाव रहेगा। आपके भाव के आधार पर आपके आसपास का वलय तैयार होता है। यह दिखाई नहीं देता है पर प्रभावी होता है। हमें संभलकर रहना होगा क्योंकि आपके भाव बहुत ही मूल्यवान है। आजकल हर मूल्यवान वस्तुओं को कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। जगह-जगह आज सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है। साध्वीजी कहती है कि बाजार में बड़े व्यापारियों के शोरूम इन सीसीटीवी कैमरों से लैस होते है। बाजार, मंदिर, दुकान, घर और सड़कों पर हर जगह सुरक्षा के दृष्टिकोण से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है और जगह-जगह पर आपको यह पढ़ने मिल जाएगा कि आप सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में है। साथ ही साथ बड़े शोरूम के अंदर स्ट्रांग रूम भी बनाया जाता है। यह स्ट्रांग रूम दिखने में तो साधारण दीवार की तरह ही होती है पर इसके अंदर लोहे के छड़ों की अधोसंरचना होती है जो इसे मजबूत बनाती है। अब आप सोचिए कि जिन वस्तुओं को हमें इस संसार में छोड़कर जाना है, उसे हम कितना सुरक्षित रख रहे है और जिन्हें हमें अपने साथ लेकर जाना है उसका हमें ध्यान ही नहीं रहता है। हमें अपने भावों को अपने साथ अगले भव तक सुरक्षित लेकर जाना है, उसका हमें होश ही नहीं है। आत्मा के लिए सबसे मूल्यवान भाव होता है, जिसे हमें संभालकर रखना है। क्योंकि यह भाव आत्मा के साथ अगले भव तक जाएंगे और उसी आधार पर हमारा अगला भव तय होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे भाव मूल्यवान कैसे हो सकते है। यह ऐसी बात है कि लोग अपने भविष्य की चिंता करते है और अपना भविष्य को जानने के लिए वे ज्योतिषियों के पास जाते है, जबकि यह तो आपके हाथों में है। आपका भविष्य आप खुद तय कर सकते हो, इसके लिए आपको किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं, किसी से सलाह-मशवरा करने की जरूरत नहीं है। आजकल तो लोग मौसम का हालचाल जानने टीवी-अखबार पढ़ते है। उसमें मौसम के वैज्ञानिक आने वाले मौसम की जानकारी देते है। तरह-तरह की मशीनों द्वारा मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है और इससे आने वाले कुछ दिनों के मौसम का हालचाल पता चल जाता है। लेकिन कोई व्यक्ति इसके बारे में नहीं बता सकता कि कब बारिशा होगी और कब समुद्र में तूफान उठेगा। साध्वीजी कहती है कि पहले के समय में लगभग सभी संयुक्त परिवार में रहते थे और जो भी सब्जी बने सब आपस में मिलकर खा लेते थे। आज तो सबका अलग-अलग नखरा होता है, आपको खाने में पसंद-नापसंद नहीं करना है, जो मिले वह खाना है। आज आप खाना खाने में नखरा दिखाओगे तो शरीर भी आपको अपने नखरे दिखाना चालू कर देगा। जीवन एक बार मिला है हमें इसे सार्थक बनाना है। आज तो संयुक्त परिवार की संख्या तेजी से कम होती जा रही है। संयुक्त परिवार में समाधान ही समाधान होते थे और जैसे ही जैसे यह कम होते जा रहे है, वैसे ही वैसे समस्याएं बढ़ती जा रही है। आज सभी लोग अलग रहना चाहते है, इसका कारण क्या है आपने कभी सोचा है। इसका कारण पसंद और नापसंद है। हो सकता है आपको जो पसंद है, वह घर के किसी अन्य सदस्य को पसंद नहीं, यह कारण है क्लेष और संयुक्त परिवार की संख्या में कमी आने की। मन के विचार के मेल नहीं होने से आज हमारा परिवार टूट रहा है, इसे कैसे संजोकर रखना है, यह आपके भावों पर निर्भर करता है।