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पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की द्वितीय प्रभात पर साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा - ‘‘धर्म फूल है कांटा नहीं, धर्म प्यार है चांटा नहीं’’

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रायपुर - एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की द्वितीय प्रभात पर बुधवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि धर्म फूल है कांटा नहीं धर्म प्यार है चांटा नहीं। दुनिया के हर कोने में धर्म की व्यवस्था बनी हुई है ताकि किसी भी तरह से मानव जागृत हो जाए। आज लोगों को नींद की गोली लेने पर भी नींद नहीं आ रही है। बेताबी इतनी बढ़ गई है कि गर्मी के दिनों में एसी में भी चैन नहीं और ठंड में हीटर भी कोई काम नहीं आ रहा है। कुछ लोग तो घड़ी देखकर टाइम बिता रहे हैं, एक-एक पल उनके लिए भारी पड़ रहा है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में सुकून नहीं है, नींद हराम हो चुकी है। अब आपको सुकून कहां मिलेगा। आप सत्संग में जाइए और सत्संग सुनते-सुनते यदि नींद का एक झोंका आ जाए तो उसका स्वाद बहुत मीठा होगा। सत्संग में यदि नींद आ जाए तो यह समझ लेना आपका मन शांत हो चुका है। क्योंकि अशांत मन लेकर जब आप प्रवचन में जाएंगे तो उसे ग्रहण नहीं कर पाएंगे और जब ग्रहण करेंगे तो मन में सुकून आएगा और उस समय यदि नींद का झोंका आ गया तो यह तो सोने पर सुहागा है। साध्वीजी कहती है कि आज अंतर आत्मा की जागृति के लिए सभी लोग लगे हुए हैं कोई सुबह योग करता है कोई मॉर्निंग वॉक करता है कोई ध्यान करता है। जैसे ही पर्यूषण पर्व आता है, वैसे ही सभी के अंदर शंखनाद हो जाता है। श्रद्धा में जुटे हुए लोग सब दूर-दूर से दादाबाड़ी पहुंच रहे हैं भक्ति का माहौल बन रहा है और लोग धर्म का लाभ लेने लगे हैं। पिता के सामने जब बेटा आगे बढ़ जाता है तो उन्हें बहुत खुशी होती है और दादा के सामने जब पोता आगे बढ़ जाता है तो वह भी गदगद हो जाते हैं। हर पिता की यह चाह होती है कि उनके रहते-रहते बेटा अपने पैरों पर खड़े हो जाए। वैसे ही जब कोई धर्म के क्षेत्र में आगे बढ़ता है, तो हमें भी बहुत खुशी मिलती है। साध्वीजी ने आगे कहा कि आज सब पैसे के पीछे भाग रहे हैं पर वह पैसा क्या है एक कागज ही तो है। एक छोटे बच्चे को भी आज पैसों का मोह है वह भी पैसों की कीमत को जानता है। कागज और नोट में अंतर सिर्फ यह होता है कि नोट में सरकार की मुहर लगी होती है ठीक वैसे ही हमें अपने जीवन में परमात्मा की मुहर लगानी है। वैसे ही आज यह पता नहीं चलता की कोई कन्या कुंवारी है या शादीशुदा। क्योंकि आजकल बच्चे सिंदूर की जगह एक छोटा सा टीका मात्रा लगाते हैं। यह देखकर आप किसी को पूछने पर मजबूर कर देते हो कि वह आपकी बेटी है या बहू है। साध्वीजी ने कहा कि आपको भगवान की भक्ति करने में कुछ नहीं लगता है केवल आपको मंदिर जाने और भगवान के मन से दर्शन करना है। आपको जो चढ़ावा चढ़ाना है, वह आपकी शक्ति पर निर्भर करता है। वह कहते हैं ना कि जितनी शक्ति, उतनी भक्ति। आप परमात्मा के दर्शन करोगे, उन्हें मानोगे तो निश्चित ही आपको उसका फल मिलेगा। वह फल दिखाता नहीं है पर जिसे मिलता है उसे समझ में आ जाता है कि उस पर परमात्मा की कृपा बरस गई है। जब आपको परमात्मा की भक्ति का फल मिलेगा तो आपकी जिंदगी संवर जाएगी। आप किसी के कहने पर, फॉर्मेलिटी करने या दिनचर्या में मंदिर जाना शामिल मत कीजिए, परमात्मा को दिल से मानिए और मन लगाकर उनके मंदिर जाइए। जीवन में जितनी भी समस्या हो, कितना भी दुख आ जाए। आप अपनी दिनचर्या मत बिगड़ना बस भगवान पर विश्वास रखना सब ठीक हो जाएगा। मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।

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