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श्रीहीरसुरी भवन में पर्युषण पर्व के चौथे दिन पूज्य श्री को कल्पसू़त्र वोहराया गया।

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रायपुर - श्रीहीरसुरी भवन नाकोड़ा भैरव सोसायटी में पर्युषण पर्व के चौथे दिन आज पूज्य श्री को कल्पसू़त्र वोहराया गया। पूज्य श्री ने बतलाया कि इस कल्पसूत्र को विशेष योगोद्व्हन करने वाले साधु भगवंत ही पढ़ सकते है, यह योगोद्व्हन आचार्य भगवंत की निश्रा में कराया जाता है। ये आगम भगवान की उपस्थिति में रखे गये सूत्रो के आधार पर लिखे गये है। अतः इन्हें परमात्मा की वाणी समझना चाहिए जो भी व्यक्ति अपने जीवन में 21 बार इस आगम को भावपूर्वक सुनता है, तो उसका मोक्ष निश्चित हो जाता है। https://youtu.be/CgusRBxPGbQ?feature=shared पुज्य श्री ने कल्पसूत्र के प्रारंभ में दिये गये साधुओं के 10 आचार का विवेचना किया ये आचार है अचेलक कल्प, औदिशिक कल्प, शयातर कल्प, राजपिण्ड कल्प, प्रितिकृमकल्प, माहाव्रत कल्प, ज्येष्ठ कल्प पूज्य श्री ने बतलाया कि चातुमार्स दो प्रकार के होते है, पहला जघन्य यह संमत्वसरी सें कार्तिकपुर्णिमा तक 70 दिनो का होता है, दुसरा उत्कृष्ट यह आसारसुदी चौदस से कार्तिक पुर्णिमाइ तक होता है विशेष कार्य होने पर पर्युषण के प्रारंभ होने तक गुरू भगवंत विहार कर सकते है आज पूज्य श्री को कल्पसूत्र जी श्री जितेंद्र कुमार जी सुभाष जी कोचर परिवार ने वोहराया।

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