"धर्म" जीते जी फल देता है और और मरने के बाद भी - संजीव भैया
संवाददाता - मनीष कोचर छुईखदान)
छुईखदान - छुईखदान में आयोजित सिद्ध चक्र महामंडल विधान में विधान संपन्न कराने विराजित बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया ने उपस्थित जैन धर्म प्रेमियों को उपदेश देते हुए कहा कि जिस तरह जीवन बीमा कंपनी अपने स्लोगन में कहती है, कि जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी उसी तरह धर्म करने वाला व्यक्ति उसका फल जीते जी भी पाता है और मरने के बाद भी पाता है धर्म करने का फल कभी खाली नहीं जाता सच्ची श्रद्धा सच्चा आचरण जीव दया क्षमा अंतरंग के अच्छे भाव भूखे को भोजन सत्य वचन पांच इंद्रियों को वश में करना गुरु की सेवा प्रतिक्रमण ब्रह्मचर्य घमंड नहीं करना यह सभी धर्म है।
संजीव भैया ने कहा कि जो किसी बीमार व्यक्ति या रोग से पीड़ित व्यक्ति को देखकर दुखी नहीं होता तो यह माना जाता है कि उस व्यक्ति में धर्म की शुरुआत नहीं हुई है.शत्रुओं के प्रति भी दया भाव होनी चाहिए उन्होंने कहा कि हर व्यक्तियों को सात व्यश्नों से दूर रहना चाहिए उन्होंने छुईखदान दिगंबर जैन मंदिर में विराजित मूल नायक चंदा प्रभु भगवान की प्रतिमा को चमत्कारी बताते हुए छुईखदान सकल जैन समाज के लोगों को सच्चा श्रावक बताते हुए धर्म के प्रति लगाव के लिए साधुवाद दिया।
ज्ञातव्य हो की पोष्ट ऑफिस के निकट मंगल भवन में दिनांक 12 दिसंबर से 18 दिसंबर तक आयोजित सिद्ध चक्र महामंडल विधान दिगंबर जैन समाज की श्रीमती शोभा रानी सपना अजय जैन शुभी अनूप जैन परिवार द्वारा आयोजित किया गया है, यह विधान बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया (कटंगी) एवं मयंक शास्त्री दमोह वाले एवं उनकी टीम के सानिध्य में संपन्न हो रहा है प्रथम दिन घट यात्रा उसके पश्चात सुबह जिन अभिषेक विधान एवं रात्रि में आरती प्रवचन का भरपूर लाभ छूई खदान नगर के धर्म प्रेमी उठा रहे हैं।