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श्रीराम प्रभु का अनुसरण ही भारत को विश्वगुरु बनाएगा - विवेक मोनू भंडारी

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डोंगरगढ़ - आज सिर्फ भारतवर्ष में ही नही अपितु सारे विश्व में आज श्री राम प्रभु की गूंज गुंजायमान है, जो आने वाले भारत के भविष्य के लिए बहुत ही शुभ संकेत है। लोगो की धर्म के प्रति जो आस्था बढ़ रही है जरूर लगता है युवा पीढ़ी अनेक प्रकार के व्याभिचार से दूर होगी, लगातार पश्चिमी सभ्यता हमारी भारतीय सस्कृति पर अपना प्रभाव बढ़ा रही है, पर पिछले कुछ वर्षों से खासकर युवा वर्ग फिर से धर्म की ओर बढ़ रहा है जो भारतीय संस्कृति सभ्यता के लिए उज्जवलता का प्रतीक दिखाई पड़ रहा है। मेरा मानना है जरूर हमें श्री राम जी के आचरण का भी अनुसरण करना होगा, तभी हमारा जीवन धन्य हो सकेगा तभी हमारा समाज खुशहाल हो सकेगा तभी हमारा देश सश्क्त हो सकेगा। श्रीराम प्रभु के जीवनकाल में हम दृष्टि डाले तब हम जान सकेंगे किस परिस्थिति में जब उनका राज्याभिषेक होने ही वाला था, उन्होंने एक आदेश पर राज पाठ छोड़कर सांसारिक मोह माया त्याग कर वनवास ग्रहण किया, किस तरह शत्रु को भी शत्रु न जान कर उसके साथ सदाचार का व्यवहार किया, किस तरह जात धर्म से ऊपर उठकर कर्म को प्रधान माना, किस तरह शबरी के जूठे बेर खाए ऐसे अनेको उदाहरण श्रीराम प्रभु के जीवनकाल से हमें मिल सकते है। थोड़ा चिंतन आवश्यक है, थोड़ा प्रयास आवश्यक है जो हम कर सकते है पूरा जीवन प्रभु के रास्ते पर चलना कठिन हो सकता है पर बहुत कुछ प्रयास से हासिल भी किया जा सकता है। सम्पूर्ण भारत वर्ष आज श्री राम प्रभु के मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा के महाआयोजन को लेकर तरह तरह की तैयारियों में बढ़ चढ़कर अपनी हिस्सेदारी बहूत ईमानदारी से निभा रहे है, बड़े उत्साह उमंग से इस महापर्व को मनाने की जोरो से तैयारियां कर रहे है बस थोड़ा चिंतन हो जाए श्रीराम प्रभु के जीवन दर्शन पर सब कुछ न सही पर कुछ एक ही श्रीराम प्रभु के आचरण को हम आने वाले दिवस के दिन संकल्पित हो कर अपने व्यवहार में, अपने आचरण में धारण कर सके इस हेतु अपने आपको संकल्पित करे तो सारा जीवन हमारा तो सफल हो ही जायेगा, साथ ही हमारा परिवार समाज और देश भी अनेको कुरीतियों से मुक्त होकर अपने सास्कृतिक वैभवता को पा जायेगा, जो सपना देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देख रहे है पुनः भारत वर्ष विश्वगुरु बन जाएगा। सिर्फ आवश्यक है श्रीराम प्रभु के गुणगान करने का नही अपितु श्रीराम प्रभु के बताए मार्ग पर चलने का सार्थक प्रयास करने का, तो जरूर समाज की असख्य बुराई पर हम निश्चित विजय पा सकेगे। हम सभी एक साथ मिलकर आने वाले दिवस को हम श्रीराम जी के मूर्ति प्रतिष्ठादिवस के अवसर पर श्री राम प्रभु के आचरण का अनुसरण करने का दृढ़संकल्प ले, हमारा लिया संकल्प ही हमें खुद परम रामभक्त होने का निश्चित प्रमाण देगा।

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