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पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. द्वारा नये वर्ष का मांगलिक तिरूवन्नामल्ले में संपन्न।

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तिरूवन्नामल्ले - पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री मृणालप्रभसागरजी म. पू. बाल मुनि श्री मीतप्रभसागरजी म. ठाणा 5 चेन्नई से विहार कर टिण्डीवनम् होते हुए ता. 31 दिसम्बर 2023 को तिरूवन्नामल्ले पधारे। श्री संघ द्वारा भव्य सामैया किया गया। मंदिर दर्शन पश्चात् मंगल प्रवचन हुआ। ता. 1 जनवरी 2024 को नूतन वर्ष का महामांगलिक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेवश्री ने फरमाया- आज ईस्वी सन् की अपेक्षा से नये वर्ष का प्रारंभ हो रहा है। हॉलाकि भारतीय संस्कृति में तो दीपावली से या चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नया वर्ष प्रारंभ होता है। और वही हमारी भारतीय परम्परा में मान्य है। किन्तु भारतीय जनमानस में भारतीय संवत् की बजाय अंग्रेजी कैलेण्डर ज्यादा रम गया है। इस कारण भारत में भी एक जनवरी को नया वर्ष मनाने की बातें शुरू हो गई है। उन्होंने कहा- काल अखण्ड है। व्यवहार की अपेक्षा से ही हम काल के भेद करते हैं। अन्यथा काल को कभी भी बांटा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा- हमारा तो हर मंगल प्रभात नये वर्ष का प्रारंभ है। हमें हर पल यह चिन्तन करना चाहिये कि आने वाला मेरा दिन कैसे बीते! मैं क्या करूँ! मेरा जीवन कैसा हो! आने वाले दिनों के लिये हमें कर्म बंधन से बचने का संकल्प लेना है। अपने वचनों पर नियंत्रण स्थापित करना है। और प्रतिज्ञा लेनी है कि मैं किसी भी जीव के लिये दुख का कारण नहीं बनूंगा। पू. साध्वी श्री प्रियस्वर्णाजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियमेघांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियमुद्रांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियसूत्रांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियदिशांजनाश्रीजी म. ठाणा 5 भी विहार कर तिरूवन्नामल्लै पधारे। बाद में पूज्यश्री ने महामांगलिक सुनाई। इस अवसर पर चेन्नई, टिण्डीवनम्, सेलम, बैंगलोर, कुरिंजीपाडी, कडलूर आदि कई क्षेत्रों से बडी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। ता. 2 जनवरी को पूज्यश्री ने सेलम की ओर विहार किया।

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