BREAKING

शत्रुंजय तीर्थ की नव्वाणु यात्रा कर लौटी दिया कोचर का जैन समाज ने किया अभिनंदन।

Share:

रायपुर - धर्मानुरागी जैन परिवार मानस ज्वेलर्स सदरबाजार के तरुण व डॉ. सुषमा कोचर की पुत्री दिया कोचर ने श्रीआदिनाथ भगवान की असीम कृपा एवं आचार्य भगवंत प.पू. श्री जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी म.सा. व प.पू श्री सम्यक रत्न सागरजी म.सा. आदि विशाल साधु-साध्वीवृंद की पावन निश्रा में अत्यंत दुर्लभ व पावनकारी नव्वाणु यात्रा पूर्ण की है। कु दिया यहां चौबे कॉलोनी स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज में बी.कॉम अंतिम वर्ष की छात्रा है। शैक्षणिक अध्ययन के साथ-साथ दिया को बचपन से ही धर्म-अध्यात्म में गहन रूचि रही है। कठिन व दुर्लभ नव्वाणु यात्रा पूर्ण कर शुक्रवार को रायपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट में दिया के फ्रैंड्स ग्रुप एवं अनेक धर्मानुरागियों ने जोरदार स्वागत किया। वहीं श्री ऋषभदेव जैन मंदिर में परिवारजनों सहित सभी कुटुम्बी और समाज जनों की ओर से दिया का अभिनंदन किया गया। दिया के बड़े पिता महेन्द्र कोचर ने बताया कि दिया ने दिनांक 29 नवम्बर 23 को खरतरगच्छाचार्य श्री जिन पीयूष सूरीश्वरजी से आशीर्वाद ग्रहण कर यह यात्रा आरम्भ की थी। इस नव्वाणु यात्रा के अंतर्गत 99 पदयात्राएं पूर्ण की गई। वहीं इसके अंतर्गत चौविहार छट तप कर 7 यात्राएं की गई। चौविहार छट याने 2 दिन का चौविहार उपवास बिना पानी के उपवास कर दो दिन में 7 बार यात्राएं की गई। इसके बाद आयम्बिल तप कर 1 यात्रा फिर 1.5 गाँव, 3 गाँव यात्रा अगले दिन 6 गाँव, उसके अगले दिन 12 गाँव यात्रा की गई। आखिर में नव टूंक की 9 यात्रा 9 चैत्यवंदन कर की गई। इस तरह कुल 101 यात्रा की गई। इस नव्वाणु यात्रा में 4000 सीढ़ियों की चढ़ाई कर श्री आदिनाथ भगवान के दर्शन को एक यात्रा माना गया है। और प्रत्येक यात्रा में श्रद्धालु 5 चैत्यवंदन करते हुए आगे बढ़ते थे। सभी श्रद्धालु यात्री हर दिन सुबह 4.30 बजे से यात्रा आरम्भ करते थे। 45 मिनट में 4000 सीढ़ी चढ़कर आदिनाथ परमात्मा के दर्शन करते थे। इस तरह रोज 3 से 4 यात्रा पूर्ण की जाती थी। 3 या 4 बार यात्रा करने के बाद प्रतिदिन जैन एकासना किया जाता था। प्रत्येक यात्री के लिए 1 दिन उपवास कर 3 यात्रा करना अनिवार्य बताया गया था। इस नव्वाणु यात्रा के अंतर्गत गांवों की यात्रा रामपोल से प्रारंभ की जाती है। रामपोल से पहाड़ी पर स्थित मंदिर का कच्चा रास्ता अत्यंत कठिन व दुर्गम्य है। औसतन एक दिन 6 गावों की यात्रा पूर्ण होती है। 12 गांवों की यात्रा रात्रि विश्राम को मिलाकर दो से तीन दिनों में पूर्ण होती है। गांवों की ये यात्राएं लगभग 35-40 किलोमीटर की होती है। गांव के सभी स्थल प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की पूजा स्थली हैं। प्रमुख तीर्थ पालितना जैन धर्म का शास्वत तीर्थ है, जहां आदिनाथ भगवान की प्रतिमा है।

Share:

Popular News