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जैन धर्म के सबसे बड़े तप उपधान तप की घोषणा की गई।

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गणाधीश पन्यास प्रवर प.पु. विनय कुशल मुनि जी मसा, प.पु. विरागमुनी जी मसा ने दिया मुहूर्त, प्रथम मुहूर्त 04/10/2024 को तथा द्वितीय मुहूर्त 06/10/24 से जैन दादावाड़ी तीर्थ एमजी रोड में चालू होगा।

रायपुर - जैन धर्म के सबसे बड़े तप "उपधान तप" की घोषणा की गई जो दिनांक  प्रथम मुहूर्त 04/10/2024 को तथा  द्वितीय मुहूर्त 06/10 से जैन दादावाड़ी तीर्थ एमजी रोड में चालू होगा।

 उपधान तप का जैन धर्म में अलग ही महत्व है इसके अंतर्गत प्रथम बार में तब तपस्वी 51 दिन, द्वितीय में 35 और तृतीय में 27 दिन तक साधु जीवन की दिनचर्या का पालन किया जाता है। इस तप को करने से मन में समता आती है और जीवन बहुत निर्मल होता है धर्म के अनुसार  जैन धर्म के अनुसार हर व्यक्ति को अपने पूरे जीवन काल में 3 बार इस सप्ताह इस सब को करना चाहिए ताकि जीवन में समता विनय और करुणा आए और मन निर्मल होl

लाभार्थी परिवार श्रीमान राजेश जी बुरड ने कहा कि ऐसा गुरुओं के अभूतपूर्व आशीर्वाद से सभी तपस्वी लोगो  की सेवा करने का मौका मुझे मिला और साथ में यह बताना भी गौरव का विषय है कि श्रीमान राजेश जी बुरड के सुपुत्र अरिहंत जी बुरड का दीक्षा का भाव भी विगत कई वर्षों से चल रहा है और गुरुदेव की आज्ञा से उपधान के  अंतिम दिन अरिहंत की दीक्षा का मुहूर्त दिया जाएगा अरिहंत मैत्री डेंटल कॉलेज मैं खजांची के रूप में वर्षों तक सेवा दिए हैं साथ ही अपने सरल और मिलनसार व्यवहार से परिवार जनों एवं मित्रों में बहुत प्रिय है अरिहंत का कहना है कि जब जीवन में ज्ञान की प्राप्ति होती है तब वह व्यक्ति परमात्मा से मिलने के लिए दीक्षा का मार्ग चूमता है और अपनी आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए निरंतर जप तप और आराधना में लीन हो जाता है।

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