सोलापुर, 20 मई - खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभसूरि ने आज भवानी पेठ स्थित पार्श्व भवन में विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा - मैं कौन हूँ, इस प्रश्न से ही धर्म का प्रारंभ होता है। जब तक व्यक्ति अपने आपको नहीं जानता, उसका शेष जानना व्यर्थ है। उन्होंने कहा-आचारांग सूत्र का प्रारंभ इसी प्रश्न से होता है। परमात्मा महावीर ने जो देशना दी थी, उसे सुधर्मा स्वामी ने आगमों के माध्यम से जंबूस्वामी से कहा। परमात्मा फरमाते हैं कि इस दुनिया में अनंत जीव ऐसे हैं जो यह नहीं जानते कि मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ? किस दिशा से आया हूँ? और कहाँ जाना है?
उन्होंने कहा- आज आदमी सारी दुनिया को जानता है, अपने पराये को जानता है, रिश्तेदारों और मित्रों को पहचानता है परन्तु यह उसकी सबसे बडी गरीबी है कि वह जानने वाले को नहीं जानता। यह शरीर मेरा स्वरूप नहीं है, क्योंकि शरीर आज है, कल नहीं था, कल नहीं रहेगा! जबकि मैं कल भी था, आज भी हूँ और कल भी रहूँगा! तो वह कौन है जो तीनों काल में है, जिसे कोई मिटा नहीं सकता, चुरा नहीं सकता।
उन्होंने कहा- संसार के साधनों को पाने और खोने में हमने अपनी कई जिन्दगियाँ गॅवा दी। संसार से कभी भी किसी को भी न कभी सुख हुआ है, न होगा। संसार से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। कितना भी अधिक हो, कम ही लगता है।
उन्होंने कहा- परमात्मा से संसार की प्रार्थना करने वाला व्यक्ति धर्म से नासमझ है । जिसने धर्म को समझा है, वह व्यक्ति सुख पाने या दुख मिटाने की प्रार्थना नहीं करता। वह सुख दुख में समभाव में रहने का संकल्प चाहता है। वह यही प्रार्थना करेगा कि सुख कितना भी हो, प्रभो! मुझे वह शक्ति देना, जिससे मेरे मन में उस सुख के प्रति आसक्ति का भाव नहीं जगे ! अहंकार का भाव मन में नहीं आने पाये । दुख को दूर करने की बजाय वह यह प्रार्थना करेगा कि प्रभो! दुख में भी आपका स्मरण सदा बना रहे और दुख में भी सुख का अनुभव करूँ, ऐसी शक्ति वह चाहता है।
उन्होंने कहा- मैं कहाँ से आया हूँ, इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण प्रश्न है-मुझे कहाँ जाना है? आगे की चिंता करो और अभी से चिंता करो। अपने भविष्य का निर्माण हमें ही करना है। हमारे अपने ही हाथों में है हमारा भविष्य! यह हमारा स्थायी ठिकाना नहीं है। यहाँ से तो हमें चलना ही पडेगा। पर कहाँ जाना है, इसका निर्णय हमारा आचरण करेगा। इसलिये अपने आचरण पर लगातार निगाह रखो।
इस अवसर पर मुनि मुकुन्दप्रभसागर ने भी अपने विचार व्यक्त किये। प्रवचन के पूर्व पूज्यश्री का सामैया किया गया।
17 Aug 2026