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जालना में जीर्णोद्धार कृत प्राचीन दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न।

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जालना - पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरुष आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य रत्न पूज्य गुरुदेव युगदिवाकर अवंति तीथर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य देव श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री मुकुन्दप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री महर्षिप्रभसागरजी म. ठाणा 5 की पावन निश्रा में एवं पूजनीया गणिनी प्रवरा पार्श्वमणि तीर्थ प्रेरिका श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया साध्वी श्री प्रियस्मिताश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियलताश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियवंदनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियप्रेक्षांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियदर्शाजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियचैत्यांजनाश्रीजी म. ठाणा 6 की पावन सानिध्यता में जालना नगर की जीर्णोद्धार कृत प्राचीन दादावाडी की प्रतिष्ठा वि. 2081 ज्येष्ठ सुदि 6 बुधवार ता. 12 जून 2024 को सप्त दिवसीय भक्ति महोत्सव के साथ अत्यन्त आनंद व उल्लास के साथ संपन्न हुई।


महाचमत्कारी इस दादावाडी का अनूठा इतिहास है। उस समय के निजाम द्वारा प्राप्त विशाल भूखण्ड पर दादावाडी का निर्माण किया गया था। दादा गुरुदेव को चरणपादुका जयपुर से लाकर प्रतिष्ठित की गई थी।

समय के प्रभाव से विशाल भूखण्ड पर अतिक्रमण आदि समस्याओं के कारण विशाल भूखण्ड छोटा हो गया। काल प्रभाव से जर्जर हुई दादावाडी का जीर्णोद्धार पू. साध्वी श्री प्रियस्मिताश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियलताश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियवंदनाश्रीजी म. की प्रेरणा से संपन्न हुआ। पू. साध्वीजी म. ने आसाम, छत्तीसगढ, बंगाल आदि क्षेत्रों में इस दादावाडी का प्रचार किया। व जीर्णोद्धार की प्रेरणा दी। परिणाम स्वरूप अत्यन्त भव्य शिखरबद्ध दादावाडी का निर्माण संपन्न हुआ। दादावाडी ट्रस्ट मंडल की विनंती स्वीकार कर पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने शुभ मुहूर्त प्रदान किया। चेन्नई चातुर्मास की ऐतिहासिक संपन्नता के पश्चात् सेलम, बैंगलोर मागडी रोड, बल्लारी, इचलकरंजी प्रतिष्ठाऐं दीक्षाएं संपन्न करवाते हुए बीजापुर, सोलापुर, बार्शी, बीड होते हुए पूज्यश्री ता. 4 जून को जालना पधारे।


ता. 5 व 6 जून का प्रवास जालना संघ में श्री चंद्रप्रभ मंदिर में रहा। ता. 7 को दादावाडी प्रतिष्ठा हेतु मंगल प्रवेश हुआ। पूजनीया साध्वीमंडल पिछले दो महिनों से यहाँ बिराजकर पूरा मार्गदर्शन कर रहे थे। ता. 8 को कुंभ स्थापनादि विधान संपन्न हुए। ता. 9 को पाटला पूजन, ता. 10 को अठारह अभिषेक व दादा गुरुदेव महापूजन, ता. 11 को वरघोडा संपन्न हुआ।

ता. 12 को प्रातः शुभ वेला मुहूर्त में अंजन विधान होने के साथ प्रतिष्ठा संपन्न हुई। मूल गर्भ गृह में प्राचीन चरणपादुका, दादा जिनकुशलसूरि की प्राचीन प्रतिमा, चारों दादा गुरुदेवों की नूतन प्रतिमाएँ बिराजमान की गई। कोली मंडप में काला गोरा भैरव, रंगमंडप में खरतरविरूद धारक आचार्य जिनेश्वरसूरि, आचार्य जिनकान्तिसागरसूरि, नाकोडा भैरव व अंबिका देवी की प्रतिमाएँ प्रतिष्ठित की गई।


समाधि स्थल पर आचार्य महेन्द्रसूरि की प्राचीन चरणपादुका विराजमान की गई। प्रतिष्ठा वर्ष की ध्वजा का लाभ श्री जवाहरमलजी चंपालालजी मुथा ने लिया। जबकि उसके बाद के वर्षों के लिये प्रतिवर्ष का नकरा रखकर लॉटरी निकाली गई।

मूल चरणों को बिराजमान का लाभ श्रीमती बसंताबाई नेमीचंदजी गेलडा परिवार ने लिया। मूलनायक जिनकुशलसूरि की प्राचीन प्रतिमा को बिराजमान का लाभ श्रीमती नेमीबाई पुखराजजी जसराजजी लूणिया, रायपुर वालों ने लिया।

गुरुपूजन का लाभ खजवाणा-चेन्नई निवासी श्रीमती मनोहरदेवी रतनलालजी माणकचंदजी कोठारी व कामली बहोराने का लाभ श्रीमती नेमीबाई पुखराजजी जसराजजी लूणिया, रायपुर वालों ने लिया। ता. 13 जून को द्वारोद्घाटन का लाभ उत्तर हावडा निवासी श्री ज्ञानचंदजी दुगड परिवार ने लिया।

दो पुस्तकों का विमोचन - पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. द्वारा लिखित जटाशंकर नामक पुस्तक के अंग्रेजी अनुवाद के दूसरा संस्करण का विमोचन पूज्य आचार्यश्री की निश्रा में जालना में दादावाडी प्रतिष्ठा के अवसर पर किया गया। विमोचन का लाभ श्री चन्द्रप्रभ जैन श्वेताम्बर मंदिर संघ, जालना द्वारा लिया गया। साथ ही पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. द्वारा संपादित बड़े अक्षरों में हिन्दी भाषा में अतिचार का प्रकाशन किया गया, जिसके विमोचन का लाभ श्रीमती मनोहरदेवी रतनलालजी कोठारी परिवार खजवाणा-चेन्नई वालों ने लिया। इन पुस्तकों का प्रकाशन जहाज मंदिर की ओर से किया गया है।

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