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उग्र तपस्वी श्री विराग मुनि जी ने लिया पचक्कान, श्री बकेला चिंतामणि पार्श्व प्रभु अपने मूल स्थान में विराजित नहीं होंगे, नहीं करेंगे पारणा।

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मुनि श्री का आज 103 उपवास, बकेला ट्रस्ट में चल रहा है जमीन विवाद, मामला न्यायालय में।

रायपुर - गणाधीश पन्यास प्रवर प.पु. विनय कुशल मुनि जी म.सा. के आज्ञानुवर्ती तप चक्रवर्ती परम पूज्य श्री विराग मुनि जी म.सा. जिन्होंने पूर्व में 171 उपवास की तपस्या सानंद संपन्न की, आज मुनिश्री का 103 उपवास है, मुनिश्री ने प्रण किया है कि जब तक श्री बकेला चिंतामणि पार्श्वनाथ की प्रतिमा जो की वर्तमान में जैन मंदिर पंडरिया में विराजित है, अपने मूल स्थान बकेला तीर्थ जो की पंडरिया से 20 किमी पर स्थित है विराजित नहीं होंगे वे पारणा नहीं करेंगे।

ज्ञात हो कि बकेला ट्रस्ट में जमीन विवाद वर्षों से चल रहा है, वर्तमान में मामला न्यायालय में लंबित है, प्राप्त जानकारी के अनुसार 2 पक्षों के बीच ये विवाद निपटता नहीं दिख रहा है, कोई भी झुकने को तैयार नहीं है। जिनशासन के हित में इस विषय में श्री विराग मुनिजी ने भी दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया है।

हमारा सकल जैन से आव्हान है कि विराग मुनिजी का पारणा कराने व बकेला तीर्थ विवाद निपटाने सकल जैन समाज 1 दिन के उपवास का पचक्कान लेवे। - आशीष जैन

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