BREAKING

पैसों के लिए आज व्यक्ति परिवार छोड़ दुनिया के किसी भी कोने जाने को तैयार है : - श्री विरागमुनि जी

Share:

रायपुर - राजधानी की पावन धरा पर जिनवाणी की वर्षा शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में बुधवार को सुबह 7 बजे शंकर नगर के संदीप भवन में दीर्घ तपस्वी श्री विरागमुनिजी का आगमन हुआ और 8.45 बजे प्रवचन हुआ। उन्होंने कहा कि सुख कहां है, सुख की तलाश में आज व्यक्ति कहां से कहां नहीं पहुंच रहा है। आज व्यक्ति धन कमाने के चक्कर में दुनिया के किसी भी कोने में जाने को तैयार है। उसे नहीं पता होता कि वहां कैसा माहोल होगा, कैसा वातावरण उनको मिलेगा, आसपास के लोग कैसे होंगे, फिर भी वह पैसों की चाह में पूरे परिवार को छोड़कर चला जाता है, केवल सुख की तलाश में। पर वह इस बात से अंजान होता है कि जिस धन में वह सुख ढ़ूढ रहा है, वह उसे वहां कभी नहीं मिलने वाला। यह वास्तविकता है। 

आज हम अपनी सोच से आगे नहीं बढ़ पा रहे है। हमने आज भी नौकरी वाली सोच को अपना रखा है और उसे आने वाली पीढ़ी पर थोपते भी जा रहे हैं। बच्चों से हम कहते है कि अच्छे से पढ़ाई करो नहीं तो नौकरी नहीं मिलेगी। अपनी सोच को नौकरी वाली बना रखा है, कभी मालिक बनने का सोचा नहीं। शादी भी करनी है तो नौकरी वाले लड़के से। नौकरी से आप क्या-क्या कर लोगे, आपके नौकरी की कौन खाएगा और कौन भोगेगा, यह पता नहीं होता फिर भी आप दिन-रात मजदूरी कर रहे हो। आपको हमेशा खुश रहना है और मजे से काम करना है क्योंकि आगे क्या होगा किसी को नहीं पता। 

आज व्यक्ति धर्म तो करता है पर वह दिखावे का धर्म होता है। सोशल स्टेटस को मेंटेन करने के लिए वह धर्म कर रहा है ताकि समाज की उसकी छवि बनी रहे। समाज में उसकी इज्जत बनी रहे और सभी काम आसानी से हो जाए इसीलिए आज आज वह धर्म के साथ सामाजिक होता जा रहा है। यह सत्य है। धर्म में भी बहुत सी खानापूर्ति हो रही है। उपवास भी आज समय देखकर किया जाता है। समय देखकर भोजन त्यागा जाता है और समय के साथ पारणा की जाती है। जबकि धर्म में समय नहीं देखा जाता, अगर 10 घंटे की जगह 12 घंटे का उपवास कर लिया तो क्या हो जाएगा। यह 12 घंटे भी हमें यह देखकर नहीं करना है कि हम आज 2 घंटे एक्ट्रा उपवास कर रहे है। बस बिना समय देखे हमें धर्म करना है। 

आत्मस्पर्शी चातुमास समिति 2024 के अध्यक्ष पारस पारख और महासचिव नरेश बुरड़ ने सभी से जिनवाणी का अधिकाधिक लाभ लेने की अपील की है।

Share:

Popular News