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संयमी जीवन की अष्टम वर्षगांठ कवर्धा में मनाई गई।

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कवर्धा 26/01/25 - वीर माता-पिता लीलादेवी - गुलाबचंदजी श्रीश्रीमाल के निवास मे 25 जनवरी 2018 को इंदौर मे जैन आचार्य 1008 पू. श्री रामलाल जी मसा के मुखारविंद से दीक्षित सुश्री छाया श्रीश्रीमाल (वर्तमान में महासती छवि प्रज्ञा जी मसा) की दीक्षा वर्षगांठ आराधना पूर्वक मनाई गई। अखंड नवकार जाप, रामेश चालीसा, स्तवन, भजन  के बाद वक्ताओं ने वर्तमान में भीलवाड़ा (राजस्थान) मे विराजित साध्वी छवि प्रज्ञा के शौर्य पूर्ण संयमी जीवन का उल्लेख किया। प्रव्रज्या पूर्व परिजनों द्वारा ली गई परीक्षा में वे पूर्णत: सफल रही। उन्होंने कहा संसार की  भौतिकता में उलझे हुए जीव को अनंत काल तक जन्म मरण का दुख भोगना पड़ता है। अतः मैंने राम गुरु की शरण लेकर सिद्धालय की ओर आगे यात्रा तय करने का दृढ़ निश्चय किया है। 

    7 वर्ष पूर्व संयम अंगीकार करने वाली महासती छवि प्रज्ञा जी ने इस दरम्यान गुरु-गुरुणी की निश्रा में आगम ज्ञान का गहन अध्ययन कर अपनी अद्भुत प्रज्ञा शक्ति का परिचय दिया है तथा उत्कृष्ट संयम की परि पालना कर जिन शासन की प्रभावना कर  सांसारिक परिजनों की कुल दीपिका भी साबित हो रही है। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पर दृष्टिपात करें तो भरे पूरे परिवार में चार उच्च शिक्षित बहने एवं वर्तमान में नगर पुलिस अधीक्षक जगदलपुर में पदस्थ आकाश श्रीश्रीमाल IAS सहोदर भ्राता है। श्रीश्रीमाल परिवार धार्मिक, सामाजिक, शासकीय सेवा आदि के क्षेत्र में अग्रणी रह बहुरत्ना वसुंधरा की उक्ति को चरितार्थ कर रहा है।

जैन स्थानकवासी संघ अध्यक्ष श्री नेमीचंद श्रीश्रीमाल एवं मंत्री गेंदमल मोदी के मंगल पाठ के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ ।

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