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बेटियों के आत्मविश्वास और आत्मरक्षा पर होगा विशेष सेमिनार, प्रफुल्ल पारख 30 को दादाबाड़ी में करेंगे संवाद।

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धन नहीं, मन की शांति में है वास्तविक सुख : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के दौरान दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ के पठन करते हुए गुरुवार को साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने प्रवचन  के माध्यम से जीवन को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए भी मनुष्य को अपनी आत्मा को नहीं भूलना चाहिए।

साध्वीश्री ने कहा कि धन और बाहरी परिस्थितियां सुख का स्थायी आधार नहीं हैं। वास्तविक सुख मन की शांति और आत्मिक संतोष में है। मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल संसार की वस्तुओं को जुटाना नहीं, बल्कि आत्मा को समझना और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ना है।


उन्होंने मोह, राग, द्वेष, क्रोध, अहंकार और लोभ को कम करने के साथ समय का सदुपयोग, संयम, अनुशासन, समर्पण और आत्मचिंतन को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा और मंदिर जाने तक सीमित नहीं है। धर्म तब सार्थक होता है, जब हमारी वाणी में मधुरता, व्यवहार में करुणा और विपरीत परिस्थितियों में समता दिखाई दे।

साध्वीश्री ने परिवार में प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि रिश्ते केवल खून से नहीं, व्यवहार और समर्पण से भी मजबूत होते हैं। जीवन की कठिनाइयों और चोटों को भी सीख के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

संसार को छोड़ना जरूरी नहीं, लेकिन संसार के मोह में स्वयं को खो देना जरूर छोड़ना है। बाहर की परिस्थितियों को बदलने से पहले अपने भीतर परिवर्तन लाना ही आत्मकल्याण की सच्ची शुरुआत है।


इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदसमुघा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

बेटियों को मिलेगी आत्मविश्वास और आत्मरक्षा की सीख, दादाबाड़ी में विशेष सेमिनार 30 को

बेटियों की उच्च शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा, संस्कार, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दादाबाड़ी, एम.जी. रोड रायपुर में 30 अगस्त रविवार को एक दिवसीय प्रेरणादायी सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का विषय “जीना इसी का नाम है” रखा गया है।

सेमिनार में नागपुर के प्रेरक वक्ता श्री प्रफुल्ल जी पारख बेटियों और युवतियों से महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद करेंगे। कार्यक्रम में दोस्ती, रिश्ते और ब्रेकअप से जुड़ी भावनाओं को समझकर सही निर्णय लेने, आत्मसम्मान एवं आत्मरक्षा के प्रति जागरूक रहने तथा अपने सपनों, पहचान और भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

आयोजकों के अनुसार आज बेटियों को केवल उच्च शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आत्मविश्वास, संस्कार, संवेदनशीलता और आत्मरक्षा की समझ देना भी जरूरी है। वर्तमान समय की गंभीर समस्याओं के प्रति बेटियों का सजग और जागरूक रहना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

कार्यक्रम में बेटियों की अनकही भावनाओं को समझने, उनके सवालों पर खुलकर बात करने और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देने पर विशेष जोर रहेगा। आयोजकों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों के साथ इस विशेष संवाद सत्र में जरूर शामिल हों।

यह कार्यक्रम परम पूज्य साध्वी श्री निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य साध्वी श्री मंजुला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में आयोजित किया जाएगा।

सेमिनार का आयोजन श्री महाकौशल जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ द्वारा तथा संयोजन श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट, रायपुर के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम रविवार 30 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक दादाबाड़ी, एम.जी. रोड, रायपुर में होगा।

आयोजकों के अनुसार सेमिनार निःशुल्क है तथा इसमें अग्रिम रजिस्ट्रेशन आवश्यक था। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 25 अगस्त निर्धारित की गई थी। अन्य  जानकारी के लिए 7000704133 पर संपर्क किया जा सकता है।

कार्यक्रम का संदेश:

“हर बेटी एक संभावना है, हर सपना एक नई दिशा है। उसे केवल अवसर नहीं, विश्वास, मार्गदर्शन और अपनापन भी चाहिए। सशक्त बेटियां ही सशक्त समाज और उज्ज्वल राष्ट्र की आधारशिला हैं।”

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