रायपुर - नवकार नगर स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं दादाबाड़ी में आयोजित दादा गुरुदेव एकतीसा भक्ति महोत्सव में नन्हे बाल भक्तों ने अपनी भावपूर्ण एवं शानदार गुरु भक्ति से उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बाल मंडलों की भक्तिमय प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण गुरु भक्ति के रंग में रंग गया।
इस अवसर पर विभिन्न बाल मंडलों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर दादा गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भक्ति अर्पित की। प्रतियोगिता में संस्कार बालक मंडल, भिलाई-3 ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वीर बालक मंडल, महासमुंद ने द्वितीय तथा सुव्रत बाल मंडल, रायपुर ने तृतीय स्थान प्राप्त कर पुरस्कार अर्जित किया।
नन्हे बाल भक्तों की जोशीली एवं संस्कारमय प्रस्तुतियों ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। बच्चों में धर्म, संस्कार एवं गुरु भक्ति की भावना देखकर उपस्थित जनसमुदाय ने उनका उत्साहवर्धन किया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक संस्कारों की मजबूत नींव बचपन में ही रखी जाए तो आने वाली पीढ़ी जिनशासन एवं गुरु परंपरा से सदैव जुड़ी रहती है।
महोत्सव में बाल मंडलों की सहभागिता ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ाते हुए गुरु भक्ति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सुंदर एवं प्रेरणादायी कार्य किया।
कलश, अखंड ज्योत और प्रतिमा स्थापना के साथ हुई शुरुआत।
महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विधि-विधान के साथ मंगल कलश की स्थापना की गई। इसके साथ चांदी की तोरण, अखंड ज्योत और दादा गुरुदेव की प्रतिमा स्थापित की गई।
कलश स्थापना और अखंड ज्योत का लाभ श्रीमान संजय जी एवं संदीप जी कोटडिया परिवार, मुंगेली ने लिया। वहीं दादा गुरुदेव की प्रतिमा बनाने का लाभ श्रीमान पदमचंद जी गोल्डी जी लूनिया, रायपुर परिवार ने लिया।
मुनि श्री संवेग रत्न सागरजी म.सा. की उपस्थिति में दादा गुरुदेव इक्तीसा की आराधना और भक्ति के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
27 मंडलों के बीच होगी महाभक्ति प्रतियोगिता
11 दिनों तक चलने वाले इस भक्ति महोत्सव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से शामिल होने वाले 27 मंडलों के बीच महाभक्ति प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
प्रतियोगिता में प्रतिदिन विजेता मंडल को 11 हजार रुपए, साथ ही 5,100 रुपए और 3,100 रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। महोत्सव के अंतिम दिन महाविजेता मंडल को 51 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
इक्तीसा पाठ और भक्ति में जुटेंगे श्रद्धालु
महोत्सव के दौरान दादा गुरुदेव की आराधना, इक्तीसा पाठ और भक्ति के विभिन्न आयोजन होंगे। इसके जरिए समाजजनों को धर्म और आध्यात्मिक साधना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है
मंदिर प्रतिष्ठा के बाद पहली बार आयोजित हो रहे इस 11 दिवसीय महोत्सव को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह देखने को मिला।