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कलयुग है इसमे देव दानव ऐक ही व्यक्ति के दो रुप मे हो सकते है।....श्री राजन् मुनि जी म सा।

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ब्यावर - आचार्य श्री रामेश के शिष्य श्रद्धेय श्री राजन मुनि जी म सा ने समता भवन मे प्रवचन के दौरान एकांत वाद अनेकांत वाद व चारो युगो की खासियत बताते हुए कहा हर युग मे देव दानव कैसे रहते थे और कलयुग मे केसे रहे रहे है उनके बारे मे विस्तार से बताया गया।

  म सा ने कहा जिस प्रकार रात- दिन,देव- दानव, मिथ्या -अमिथ्या एक दुसरे के विरोधी होते रहते है सतयुग मे देव अलग होते जो पृथ्वी लोक मे रहते दानव अलग होते जो पाताल लोक मे रहते थे जो कभी उनका एक दुसरे का साथ नही हो सकता।द्वापर युग मे देव दानव एक साथ पृथ्वी लोक पर ही रहते है जैसे राम रावण,क्रेता युग मे एक ही घर मे रहते थे जैसे कोरव पांडव, इसी प्रकार कलयुग मे एक ही शरीर मे रहने लगे जो बाहर से दिखने मे साधु अंदर से शैतान होते है।एक ही व्यक्ति के दो रुप मे रहने लगते है।


  इससे पहले भजन से कहा लाखो को पार लगाया है भगवान तुम्हारी वाणी ने,एकांत वाद पर कहा वो मूल तत्व होता है जो परिवर्तन नही होता अनेकांत वाद मे मूल तत्व को खोजा जाता है वह सिर्फ जैन दर्शन मे होता है।वस्तु नित्य होती है अनीत्य भी होती है।

   इससे पहले श्री अमित मुनि जी म सा ने भजन से कहा मानव का तन अनमोल मिला है मोक्षार्थी बनू मोक्षार्थी बनू।मोक्ष प्राप्ति के लिए हमे सारी ताकत लगानी होगी उसके लिए अपने भावो को धर्म करने मे लगाना होगा भीतर मे क्षमा भाव लाना होगा, अपने कषायो को दूर करना पडेगा। मन से आक्रोश असंतोष को निकालने से समभाव मे आ जाते है।

     संचालन उतमचंद सुराणा ने करते हुए बताया उदयपुर मे संथारा साधिका साध्वी रामप्रेम श्रीजी म सा का संथारे का आज 48 वां दिन गतिमान है।

संघ प्रवक्ता - नोरतमल बाबेल, साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर

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