बाड़मेर - अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद केयुप के द्वारा बाड़मेर नगर की धन्म भ्रा पर एक अद्भुत केयुप परिसर का भव्य नवनिर्माण किया जा रहा है, जहां भवन निर्माण के साथ साथ भव्य जिन मंदिर एवं दादावाड़ी का भी सुरम्य निर्माण संपन्न हुआ। जिसकी पावनकारी भव्य अंजनशलाका प्रतिष्ठा एवं 5 मुमुक्षुओं का दीक्षा समारोह दिनांक 16 फरवरी को आनंद व उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
शिखरबद्ध अतिभव्य इस जिन मंदिर के निर्माण का सम्पूर्ण लाभ बाडमेर-मुंबई निवासी श्री जीवणमलजी बबरीदेवी, नेमीचंदजी धाई देवी, बाबुलालजी सौ शांतिदेवी भरतकुमार छाजेड़ बाड़मेर परिवार ने पूजनीया प्रवर्तिनी आगम ज्योति श्री प्रमोद श्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म.सा. की पावन प्रेरणा से लिया। इस महोत्सव के मुख्य लाभार्थी बनने का सौभाग्य भी इसी छाजेड परिवार ने लिया। यह प्रतिष्ठा पूज्य गुरुदेव प्रज्ञा पुरुष आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव अवंति तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा., पू. गणि श्री मयंकप्रभसागरजी म.सा. पू. मुनि श्री समयप्रभसागरजी म.सा., पू. मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा., पू. मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म.सा., पू. मुनि श्री मृगांकप्रभसागरजी म.सा. एवं मुनि श्री मुखरप्रभसागरजी म.सा. की पावन निश्रा में सम्पन्न हुई।
पूजनीया आगम ज्योति प्रवर्तिनी श्री प्रमोदश्रीजी म.सा की शिष्या पू. बहिन म.डॉ श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म.सा., पू. साध्वी डॉ. श्री शासनप्रभाश्रीजी म.सा., पू. साध्वी डॉ. श्री नीलांजनाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा, पू. प्रखर व्याख्यात्री श्री हेमप्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. साधी श्री कल्पलताश्रीजी म.सा., पू.साधी श्री अमितयशाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा तथा पूजनीया महत्तरा पद विभूषिता साध्वी श्री चंपाश्रीजी म.सा. जितेन्द्रश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. साध्वी श्री मयूरप्रियाश्रीजी म .सा. आदि ठाणा की पावन सानिध्यता इस महोत्सव को प्राप्त हुई।
समारोह का प्रारंभ ता. 11 फरवरी को पूज्य गुरुदेवश्री के मंगल नगर प्रवेश से हुआ। दिनांक 12 फरवरी से कुंभ स्थापना, दीपस्थापना आदि के साथ पंचाह्निका महोत्सव का शुभारंभ हुआ। ता. 13 फरवरी को परमात्मा का जन्म कल्याणक मनाया गया। दिनांक 14 फरवरी को दोपहर में हल्दी एवं केसरिया वस्त्र रंगने का कार्यक्रम रखा गया जिसमें पूज्य गुरुदेवश्री ने मुंहपत्ति पर केसर से नंद्यावर्त बनाया। सकल श्री संघ द्वारा यह दृश्य भाव विभोर होकर देखा गया। ता. 15 फरवरी को दीक्षा कल्याणक के व मुमुक्षुओं के वर्षीदान के भव्य वरघोड़े का आयोजन किया गया। यह वरघोड़ा बाड़मेर के मुख्य गलियों से होता हुआ भव्य प्रवचन सभागृह में पहुंचा। पूज्यश्री का मंगल प्रवचन एवं दीक्षा कल्याणक संपन्न हुआ। दोपहर 4 बजे मुमुक्षुओं का अंतिम वायणा संपन्न हुआ। रात्रि में अभिनंदन समारोह का आयोजन हुआ जिसमें मुमुक्षुओं के उदगार सुनकर लोगों की आंखों से अश्रु बहने लगे। ता. 16 फरवरी प्रातः शुभ मुहूर्त में भव्य प्रतिष्ठा संपन्न हुई। शिखर पर ध्वजा, मुख्य कलश, परमात्मा आदि बिंबों की प्रतिष्ठा छाजेड परिवार ने संपन्न की। आचार्य श्री जिनकांतिसागरसूरिजी के ध्वजा का लाभ श्रीमती टीपूदेवी भूरमलजी बोथरा परिवार बाड़मेर ने लिया। नाकोड़ा भैरव की ध्वजा का लाभ जगदीशकुमारजी पवनकुमारजी भंसाली परिवार पाली ने लिया। पप्रावती देवी की हुजा का लाभ श्रीमती शांतिदेवी मुल्झानमलजी नाहटा परिवार गांधीधाम ने लिया। प्रतिष्ठा के पश्चात् कुशल वाटिका के प्रांगण में पांच मुमुक्षुओं का दीक्षा विधि विधान शुभारंभ हुआ। मुमुक्षुओं का विजय तिलक किया गया जिनका लाभ मुमुक्षु अक्षय मालू का संपतराजजी, पुरूषोत्तमदासजी, धारीवाल परिवार सनावड़ा-सूरत, मुमुक्षु भावना संखलेचा का सोहनलालजी रिखबदासजी संखलेचा परिवार नेतराड वाले, मुमुक्षु आरती बोथरा का- मटकादेवी मगराजजी डोसी परिवार, मुमुक्षु निशा बोथरा का घेवरचन्द्रजी भगवानदासजी बोथरा परिवार, मुमुक्षु साक्षी सिंघवी का अशोककुमारजी पीरचन्द्रजी सिंघवी सांचौर ने लिया। मुमुक्षुओं ने उपकारियों के उपकारों का गुणगान किया व सकल श्री संघ से मिच्छामि दुक्कड़ मांगा। परिवारजनों से अंतिम मिलन व चरण स्पर्श कर उनके इस ममत्व त्याग को बधाया। यह अनुपम दृश्य जनसमूह को रुला रहा था। अब वह मंगल घड़ी बहुत निकट ही थी, जिस पल की वर्षों से मुमुक्षु प्रतीक्षा कर रहे थे। वे अपने पाँवों में संयम के घुंघरू बांध गुरुदेव के समक्ष पहुंचकर निवेदन करने लगे- मने राजोहरण आपो, महा मोह ना बंधन कापो इस अनुगूंज ने सभी के हृदय में संयम अनुमोदना की रणकार पैदा हो गई। सभी अपलक नयनों से अब तीव्र प्रतीक्षा में थे, पूज्यश्री अपने आसन से खड़े हुए और शुभ मुहूर्त में सभी मुमुक्षुओं को रजोहरण प्रदान किया। रजोहरण हाथों में आते ही सभी ने नृत्य द्वारा अपनी भावाभिव्यक्ति दी। वर्षों का स्वप्न साकार हुआ। मुमुक्षुओं ने समस्त आभूषणों का त्याग कर वेश परिवर्तन के लिए प्रस्थान किया। मुमुक्षु वेश परिवर्तन कर पुनः जब पांडाल में आए तो लोगों ने उनके चेहरे पर आए नूतन त्याग आवरण को निहारकर अपने नयनों को पुनीत किया। नूतन संयमी का केशलुंचन किया गया, करेमि भंते का प्रत्याख्यान करवाया गया। संघ ने उनके इस महान त्याग को भावों से बधया। नामकरण का विधान प्रारम्भ हुआ। मुमुक्षुओं के नूतन नामकरण का लाभ मुमुक्षु अक्षय मालू का- बंशीध्रजी करणमलजी मालू, मुमुक्षु भावना संखलेचा का कमलादेवी भीखचन्द्रजी बोहरा, पुष्पादेवी सम्पतराजजी श्री श्रीमाल, मुमुक्षु आरती बोथरा का श्री दीक्षित मांगीलालजी सिंघवी, मुमुक्षु निशा बोथरा का-शांतिदेवी बाबूलालजी वडेरा, मुमुक्षु साक्षी सिंघवी का स्व अशोकुमारजी पीरचन्द्रजी सिंघवी ने लिया। पूज्यश्री के द्वारा सभी के नूतन नाम की उद्घोषणा सुनकर उपस्थित जन समुदाय ने हर्षनाद करते हुए अक्षतों से बधया। मुमुक्षु अक्षय मालू का नूतन नाम मुनि श्री मेरुप्रभसागरजी म.सा., मुमुक्षु कुमारी भावना संखलेचा का नूतन नाम साकी श्री ध्यानरुचिश्रीजी म.सा., मुमुक्ष कमारी आरती बोथरा का नूतन नाम साध्वी श्री अपूर्वरुचिश्रीजी म. सा., मुमुक्षु कुमारी निशा बोथरा का नूतन नाम साध्वी श्री अनन्यरुचिश्रीजी म.सा., मुमुक्षु कुमारी साक्षी सिंघवी का नूतन नाम साधी श्री आप्रुचिश्रीजी म.सा., रखा गया। गुरु भगवंत व साध्वीजी ने वासक्षेप से तथा श्रावक संघ ने अक्षतों से नूतन साधु-साध्वीजी को बधाया।
मुमुक्षुओं के धर्म माता-पिता बनने का लाभ मुमुक्षु अक्षय मालू का- श्री बंशीधरजी करणमलजी मालू मुमुक्षु भावना संखलेचा का- श्री केवलजी रिखबदासजी संखलेचा मुमुक्षु आरती बोथरा का- श्री चम्पालालजी शेरमलजी डोसी, मुमुक्षु निशा बोथरा का श्रीमति ऊदी देवी मांगीलालजी धारीवाल, मुमुक्षु साक्षी सिंघवी का-श्री केवलचन्द्रजी पीरचन्द्रजी सिंघवी ने प्राप्त किया। महोत्सव की शान इतनी निराली थी कि जनता विशाल पाण्डाल में समा नहीं पाई। बाडमेर दीक्षा महोत्सव एक कीर्तिमान बना।
इस अवसर पर अहमदाबाद से डॉ. जितेन्द्र बी. शाह आदि विशिष्ट अतिथिगणों का पदार्पण हुआ था।