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लोग्गस सिद्धि प्राप्त करने वाला पाठ होता इसको सिखने के लिए सागर से गभीर बनना होगा : - शासन दीपक श्री नीरज मुनि जी मसा।

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ब्यावर - आचार्य रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री नीरज मुनि जी म सा ने समता भवन मे प्रवचन के दौरान बताया गया कि लोग्गस का मूल पाठ सिद्धा सिद्धिं मम दिसन्तु यह मार्ग मोक्ष प्राप्त करने के लिए होता है क्योंकि यह हमे सिद्धि का मोक्ष मार्ग दिखाता रहता है जब तक हम मोक्ष मार्ग के लक्ष्य को प्राप्त सिद्ध गति को जाने की बार बार प्रेरणा देता है। 32 शास्त्रो मे अंतिम शास्त्र आवश्यक सूत्र है वो करना जरुरी होता है इसमे उतम सामायिक के साथ समभाव मे रहना होता हे ताकि हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

    म सा ने लोग्गस के अंतिम वाक्यम पर बताया सागरवरगंभीरा, सिद्धा सिद्धिं मम दिसन्तु। आप सागर के समान गंभीर मे किसी तरह से चंचलता नही होती महागंभीर रहते भगवान की वाणी देशना किसी को पीडा देने वाली नही होती वह सहज भाव से हमारे लिए हितकारी है भजन से कहा सद कर्म हमारे भाग्य विधाता है सद कर्म आत्मा मे लगे मेल को हटाकर मन मे निर्मलता आ जाती है। इसी कारत उन महापुरुषों का जिसको अवधि ज्ञान आ जाता उन पर हमारा नजरिया बदल जाता है।ज्ञान को सिखने के लिए गभीरता होना जरूरी है।

  इससे पहले श्रद्धेय श्री हिमांशु मुनि जी म सा ने कहा अहिंसा सबसे पहला पद रहा जो हमारी आत्मा के समान है वह न किसी जीव को मारता न किसी को नष्ट करने की भावना होती है।जिने की इच्छा रखने वाले को आसक्ति से दूर रहना होगा।जो कार्य हमे अच्छा नही लगता वो कार्य ओर किसी जीव के साथ नही हो क्योंकि सभी जीव को अपने समान है।जीवो को सोचना समझना मनन करना जरूरी है ताकि हमारे अंदर बदलाव आ सके।घर मे महापुरुषों पूर्वजों कि फोटो सिर्फ परिचय के लिए लगाते हे न कि उन्हें पूजा करने के लिए।

आज उदयपुर मे सथारा साधिका रामप्रेम श्री जी म. सा. का 50 वां दिन गतिमान है।

संघ प्रवक्ता - नोरतमल बाबेल, साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर

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