ब्यावर - समता भवन मे आचार्य श्री रामेश का 33 वां युवाचार्य दिवस एवं बहुश्रुत वाचनाचार्य उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा. का षष्ठम उपाध्याय पदारोहण दिवस तप त्याग के साथ श्रुतभक्ति दिवस के रुप मे दो मार्च तक मनाया जायेगा।
आचार्य श्री रामेश् के शिष्य शासन दीपक श्री नीरज मुनि जी म सा ने प्रवचन के दौरान श्रुत भक्ति दिवस पर कहा गुरु कैसे होते उनमे क्या क्या गुण होते उनका अनुभव केसा होना चाहिए हमारे गुरु रामेश आगमधर् है यानि आगमो को धारण करने वाले हे इसी कारण उनको परमागम रहस्य ज्ञाता की उपाधि दी गयी।
म सा ने कहा उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि जी म सा कदम कदम पर आगम पर विचार करते रहने के साथ आगम की गहराई मे जाकर सत्य प्रकट कर देते है वह आगम को.भीतर उतार दिया ओर सत्य पर निश्चित रहे।वह सदैव क्रिया सवर पौषध करने पर जोड देते है सारी क्रिया का सार संवर मे है।
म सा ने सम्रदाय पर कहा सम्रदाय मतलब सम्यक रूप से देना होता है यानि परम्परा से ज्ञान को देना होता है एक गुरु से सिखा हुआ ज्ञान उनके शिष्य को प्रदान करना होता है वो सम्रदाय होता है।गुरु शिष्य की बात एक समान हो हमे भी ऐसे गुरु से अनुभव लेकर अच्छा बनने का प्रयास करें।
इससे पहले राजन मुनि जी म सा ने कहा हमारे महापुरुष ज्ञानी दृष्टि वाले होते है उदाहरण देकर समझाया कि ज्ञानी दृष्टि वाले गंदी नाली मे भी गंगा का पानी देख लेते थे।1992 मे से अब तक राम राजेश की जोडी जुगल बदी चली आ रही है जो ज्ञानी दृष्टि से गंगा बहाते जा रहे है।
इससे पहले हिंमाशु मुनि जी म सा ने भजन से कहा राजेश मुनि आपका अभिंनदन चरणो मे हो वदंन।उपाध्याय प्रवर की सोच कठिन से कठिन को सरल बना देती है जैसे सयंम का शतक पूरा कराने मे लगे है राम राजेश कै पास जाना टर्म कार्ड के समान है।
संचालन गोतमचंद चौधरी ने करा रूची कोठारी, प्रकाश बाई कोठारी,वीना नाहर अंकुश बोहरा, धर्मीचद औस्तवाल ने अपने विचार रखे अनु गुलेछा विमलेश औस्तवाल व प्रमिला बोहरा ने भजन से भाव व्यक्त किये।
संघ प्रवक्ता - नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर