रायपुर - नवकार नगर स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं दादाबाड़ी में आयोजित 11 दिवसीय दादा गुरुदेव एकतीसा भक्ति महोत्सव के दूसरे दिन भक्ति और गुरु आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ भैरव भक्त मंडल के सदस्यों द्वारा दादा गुरुदेव के एकतीसा पाठ से किया गया। इसके पश्चात विभिन्न भक्ति मंडलों ने भावपूर्ण भजनों, मधुर सुर-ताल और शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को पूरी तरह गुरु भक्ति से सराबोर कर दिया।
धर्म रक्षक श्री शांतिनाथ जैन मंडल, महासमुंद
भखारा से आए नवकार म्यूजिकल ग्रुप ने कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान हासिल किया। शांति विजय मंडल, राजनांदगांव ने अपने भावपूर्ण भजनों, सधे हुए सुर-ताल और भक्तिमय प्रस्तुति से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
प्रतियोगिता में शामिल सभी मंडलों ने दादा गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा, समर्पण और गुरु भक्ति को संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त किया। प्रस्तुतियों के दौरान पूरा परिसर जयकारों और भक्तिमय स्वरों से गूंज उठा। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। बच्चों में धर्म, संस्कार और गुरु भक्ति की भावना देखकर उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में सुरेश जी बैद जी चोपड़ा एवं रेखा जी राय सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। निर्णायकों ने प्रतिभागी मंडलों की प्रस्तुति, सुर-ताल, भाव, अनुशासन एवं गुरु भक्ति की अभिव्यक्ति के आधार पर मूल्यांकन किया।
27 मंडलों के बीच महाभक्ति प्रतियोगिता
11 दिनों तक चलने वाले इस भव्य भक्ति महोत्सव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से आए 27 भक्ति मंडलों के बीच महाभक्ति प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता में प्रतिदिन विजेता मंडल को ₹11,000, द्वितीय स्थान प्राप्त मंडल को ₹5,100 तथा तृतीय स्थान प्राप्त मंडल को ₹3,100 की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। महोत्सव के अंतिम दिन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले महाविजेता मंडल को ₹51,000 की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा।
एकतीसा पाठ और भक्ति में जुटेंगे श्रद्धालु
महोत्सव के दौरान दादा गुरुदेव की आराधना, एकतीसा पाठ एवं भक्ति के विभिन्न आयोजन निरंतर होंगे। आयोजन का उद्देश्य समाजजनों को धर्म, साधना, संस्कार और गुरु परंपरा से जोड़ना है। मंदिर प्रतिष्ठा के बाद पहली बार आयोजित हो रहे इस 11 दिवसीय महोत्सव को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह और उमंग का वातावरण है।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक आस्था को मजबूत नहीं करते, बल्कि नई पीढ़ी में संस्कार, अनुशासन और गुरु भक्ति के बीज भी रोपित करते हैं। यदि बचपन से ही बच्चों को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ा जाए तो आने वाली पीढ़ी जिनशासन और गुरु परंपरा से सदैव जुड़ी रहेगी।
आज के पुरस्कार के लाभार्थी श्री सुभाष जी संदीप जी छाजेड नगरी वाले थे।
29 Aug 2026