रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने कहा कि जीवन में परिवर्तन जरूरी है। जब तक हमारे विचारों, व्यवहार और परिणामों में बदलाव नहीं आएगा, तब तक जीवन का वास्तविक कल्याण संभव नहीं है।
साध्वीश्री ने कहा कि मन में कोई बात गहराई से ठहर जाए या किसी घटना से भीतर तक ठेस पहुंचे, तब व्यक्ति परिवर्तन के बारे में सोचता है। वैसे तो हर व्यक्ति अपने जीवन में परिवर्तन के लिए मेहनत करता है, लेकिन अधिकांश प्रयास आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए होते हैं। हमें यह समझना होगा कि हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हमारी आत्मा है और परिवर्तन का प्रयास आत्मकल्याण के लिए होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन बहुत दुर्लभ है। हमें चिंतन करना चाहिए कि यह जीवन हमें केवल संसार में उलझने के लिए मिला है या आत्मा की उन्नति के लिए। जीवन का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए और उस लक्ष्य को पाने के लिए सही दिशा में निरंतर पुरुषार्थ करना चाहिए।
साध्वीश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पत्थर को अच्छा शिल्पकार मिल जाए तो उससे सुंदर प्रतिमा बन जाती है और मिट्टी को कुशल कुम्हार मिल जाए तो वह सुंदर आकार ले लेती है। उसी प्रकार जीवन में यदि सही दिशा, दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मकल्याण की भावना आ जाए तो व्यक्ति अपने जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
उन्होंने कहा कि अक्सर हम शिकायत करते रहते हैं कि जीवन में कुछ नया नहीं हो रहा, सब कुछ घिसा-पिटा चल रहा है। लेकिन जब तक हम स्वयं परिवर्तन के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक परिस्थितियां भी नहीं बदलेंगी। इच्छाशक्ति के साथ सही दिशा में किया गया पुरुषार्थ ही जीवन को नई दिशा दे सकता है।
इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के अध्यक्ष, महासचिव मुकेश निमाणी, कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
33 उपवास की तपस्या पूर्ण करने पर आदित्य पारख का हुआ बहुमान।
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत चल रही तप आराधना में 33 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण करने पर तपस्वी आदित्य पारख का श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया।
आदित्य पारख ने 33 उपवास की तपस्या के माध्यम से आत्मसंयम, त्याग और साधना का परिचय दिया। तपस्या पूर्ण होने पर श्रीसंघ के पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने उनका सम्मान कर तप की अनुमोदना की और उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।
अक्षयनिधि, समवसरण और कषायविजय तप की 15 दिवसीय आराधना 31 अगस्त से दादाबाड़ी में।
रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अक्षयनिधि, समवसरण एवं कषायविजय तप के तपस्वियों के लिए 15 दिवसीय विशेष आराधना का आयोजन किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन 31 अगस्त से प्रारंभ होगा।
आयोजन के दौरान तपस्वियों के लिए देववंदन, एकासना सहित विभिन्न धार्मिक आराधनाएं कराई जाएंगी। 15 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में तपस्वी श्रद्धा और संयम के साथ आराधना करेंगे।
आयोजन समिति के अनुसार तप के माध्यम से आत्मसंयम, त्याग और साधना की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। तपस्वियों के साथ श्रीसंघ के श्रद्धालु भी विभिन्न आराधनाओं में सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।
यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में आयोजित किया जाएगा।
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति ने समाज के श्रद्धालुओं से इस 15 दिवसीय आराधना में सहभागी बनकर तप, संयम और धर्म साधना का लाभ लेने का आग्रह किया है।
खेल के साथ संस्कार और सीख का होगा संगम, बच्चों को सिखाया जाएगा रूबिक क्यूब।
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आयोजन समिति की ओर से दादाबाड़ी परिसर में संस्कारम शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर में बच्चों के लिए धर्म और संस्कारों के साथ मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद गतिविधियां भी रखी गई हैं। इसी क्रम में बच्चों को रूबिक क्यूब सिखाया जाएगा।
रूबिक क्यूब की विशेष टीम बच्चों को इसे हल करने का प्रशिक्षण देगी। खेल और मनोरंजन के माध्यम से बच्चों में एकाग्रता, धैर्य, रचनात्मक सोच और समस्या का समाधान करने की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजन समिति के अनुसार संस्कारम शिविर का उद्देश्य बच्चों को धर्म और जैन संस्कारों से जोड़ने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना है। शिविर में खेलों के माध्यम से संस्कार, प्रेरणादायक कहानियां और विभिन्न शिक्षाप्रद गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रतिभागी बच्चों के लिए आकर्षक एवं उपयोगी उपहार भी रखे गए हैं।
यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका श्री मंजुला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में होगा।
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति की ओर से बताया गया कि संस्कारम शिविर के माध्यम से बच्चों में धर्म, संस्कार, अनुशासन, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के गुण विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों ने बच्चों से इस विशेष शिविर में उत्साह के साथ शामिल होने की अपील की है।
29 Aug 2026