रायपुर 7 नवंबर 2026: - श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय मार्ग, रायपुर में इन दिनों परम पूज्य जैन संतवृंद के पावन सानिध्य और मंगल प्रवचनों से संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय, भक्ति-रस एवं जिनेन्द्र भक्ति की बयार से सराबोर हो रहा है। तपोनिष्ठ, प्रासुक साधना के धनी प.पु. मुनि १०८ श्री आगम सागर जी महाराज, मुनि १०८ श्री पुनीत सागर जी,महाराज,एलक १०५ श्री धैर्य सागर जी महाराज,एलक १०५ श्री स्वागत सागर जी महाराज ससंघ के अलौकिक सान्निध्य में धर्म-गंगा निरंतर प्रवाहित हो रही है। आज प्रातःकाल से ही जिनालय में विविध धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
वर्षायोग समिति के अध्यक्ष संजय नायक जैन एवं सचिव राजेश रज्जन जैन ने बताया कि आज दिनांक 7 नवंबर 2026 को प्रातः 8:00 बजे मूलनायक भगवान के समक्ष श्रीजी को पांडुकशिला में विराजमान कर अष्टद्रव्य से मंगल अभिषेक, शांतिधारा एवं आचार्यश्री पूजन का परम सौभाग्य उपस्थित श्रावक बंधुओं को प्राप्त हुआ। रिद्धि-सिद्धि, सुख-शांति प्रदाता इस पावन शांतिधारा का अहोभाग्य समाज के धर्मप्रेमी जनों ने प्राप्त किया। इसके पश्चात पूर्ण श्रद्धा और नवधा भक्ति के साथ मुनिसंघ को पावन आहार-चर्या कराने का परम सौभाग्य विभिन्न पुण्यार्जित परिवारों को प्राप्त हुआ।
मुनि श्री आगम सागर जी महाराज की मंगल देशना: "150 वर्ष प्राचीन जिनालय के मूलनायक का हो प्रतिदिन महामस्ताभिषेक व विश्वशांति के लिए शांतिधारा"
आज की धार्मिक कक्षा में अपने ओजस्वी वचनों से मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए अर्कतप और धर्म प्रभावना की मंगल देशना प्रदान की। महाराजश्री ने पावन आह्वान करते हुए फरमाया कि 150 वर्ष प्राचीन बड़ा मंदिर की मूलनायक बेदी में विराजमान प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ का महामस्ताभिषेक एवं शांतिधारा प्रत्येक दिवस होनी चाहिए। महाराजश्री ने इसकी रूपरेखा स्पष्ट करते हुए समाजजनों को निर्देशित किया कि "समाज के प्रत्येक परिवार को माह के प्रत्येक दिवस जिनालय में उपस्थित होकर शांतिधारा करने का नियम करना होगा। जिस भी समाज बंधु को शांतिधारा का नियम दिया जा रहा है, वे सपरिवार एवं अपने इष्ट-मित्रों सहित प्रातःकाल जिनालय में पधारकर बड़े ही हर्षोल्लास के साथ महामस्ताभिषेक एवं शांतिधारा का अनुष्ठान आवश्यक रूप से संपन्न करें।"
अपने दिव्य उद्बोधन में मुनिश्री ने श्री आदिनाथ भगवान की महिमा का बखान करते हुए कहा कि बड़ा मंदिर के मूलनायक भगवान की यह 150 वर्ष प्राचीन प्रतिमा अत्यंत ही चमत्कारिक एवं अतिशयकारी है। इन प्राचीन प्रतिमा के असीम पुण्य प्रताप के प्रभाव से ही जिनालय, सकल जैन समाज और समाज का प्रत्येक परिवार निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है तथा समस्त विघ्न-बाधाओं से सुरक्षित एवं दूर है। इस दिव्य मूलनायक प्रतिमा का प्रभाव इतना विराट एवं अलौकिक है कि मंदिर के आसपास निवासरत परिवार एवं समस्त व्यापारी वर्ग भी उत्तरोत्तर प्रगति की ऊँचाइयों को छू रहे हैं, जिसे आप सभी ने प्रत्यक्ष रूप से पिछले कई वर्षों से अनुभव किया है। मुनिश्री ने संघ की ओर से मंगल प्रेरणा देते हुए कहा कि ऐसे प्रत्यक्ष अतिशयकारी मूलनायक भगवान का नित्य अभिषेक और शांतिधारा होने से इस ऐतिहासिक जिनालय का प्रभाव और अतिशय चतुर्दिक और अधिक बढ़ेगा। साथ ही, इसके पुण्यार्जित प्रभाव से शीघ्र ही नवीन जिनालय का भव्य निर्माण कार्य भी प्रारंभ होगा।
मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने प्रेरणा देते हुए बताया कि जैन धर्म में किसी भी जैन मंदिर के मूलनायक भगवान का प्रत्येक दिवस अभिषेक, महामस्तकाभिषेक और शांतिधारा करने से अनंत पुण्यों का संचय तथा असाता कर्मों की निर्जरा होती है। शांतिधारा मूल रूप से भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक का वह पावन अनुष्ठान है जो आत्मा की शुद्धि, सांसारिक कष्टों से मुक्ति और विश्व कल्याण की भावना से किया जाता है।
प्रतिदिन मूलनायक प्रभु की शांतिधारा और अभिषेक करने से निम्नलिखित मुख्य लाभ प्राप्त होते हैं साथ ही प्रतिदिन भक्तिभाव से जिनेन्द्र देव का अभिषेक करने से संचित पाप कर्मों का क्षय (निर्जरा) होता है और महान पुण्य का बंध होता है। इस अनुष्ठान को देखने और करने से श्रद्धालु के मन, वचन और काया की शुद्धि होती है तथा हृदय में धर्म के प्रति गहरी श्रद्धा जागृत होती है। वर्तमान समय के तनाव और भय से मुक्ति मिलती है। पवित्र मंत्रों के उच्चारण और शांतिधारा से मन शांत होता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रतिदिन प्रभु की शांतिधारा का गंधोदक मस्तक पर लगाने और इस प्रक्रिया में लीन होने से शारीरिक रोग (व्याधि) और मानसिक कष्ट (आधि) दूर होते हैं।जीवन में आने वाले अप्रत्याशित संकट, विघ्न-बाधाएं और गृह-क्लेश इस पावन धारा के प्रभाव से शांत हो जाते हैं। शांतिधारा के मंत्रों में केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज, राष्ट्र और संसार के प्राणियों के कल्याण की कामना की जाती है। यह अनुष्ठान आत्मा में अहिंसा, करुणा, दया और आत्मसंयम की भावनाओं को विकसित करता है, जिससे समाज में मैत्री भाव बढ़ता है।
विशेष संचालन हेतु प्रभार सौंपा गया
इस पावन एवं महत्वपूर्ण कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने तथा प्रत्येक दिवस की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु जिनालय की वर्तमान ट्रस्ट एवं कार्यकारिणी कमेटी के सदस्यों को विशेष प्रभार सौंपा गया है।
सकल जैन समाज, रायपुर ने समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से सविनय अपील की है कि वे इन पावन धार्मिक आयोजनों एवं संतों के मंगलचरणों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं, जिनवाणी और संतों के दिव्य वचनों को अपने जीवन में उतारकर आत्मिक पुण्य का संचय करें।
सूचनादाता - प्रणीत जैन
वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज, रायपुर (छ.ग.)