आईपीएल क्रिकेट और बांबे मार्केट का सट्टा संरक्षण पर फल फूल रहा। पंडरिया नगर क्षेत्र सहित गांवों में भी आईपीएल क्रिकेट मैच के सट्टा साथ ही बांबे से चल रही सट्टा बाजार ने क्षेत्रीय स्तर पर भी सटोरियो के माध्यम गिरफ्त में है, वैसे तो पडरिया पुलिस छोटे-मोटे पट्टीदारों को पकड़ कर अपना पीठ थपथपा खोखले दावे करने में ही लगी हुई है।

रामकुमार टण्डन
पंडरिया नगर क्षेत्र सहित गांवों में भी आईपीएल क्रिकेट मैच के सट्टा साथ ही बांबे से चल रही सट्टा बाजार ने क्षेत्रीय स्तर पर भी सटोरियो के माध्यम गिरफ्त में है, वैसे तो पडरिया पुलिस छोटे-मोटे पट्टीदारों को पकड़ कर अपना पीठ थपथपा खोखली दावा करने में ही लगी हुई है।
इस समय आईपीएल क्रिकेट का सट्टा चल रहा है, भले ही प्रशासन अनजान है, पर शहर सहित आसपास के सारे बुकी इस समय सट्टे का कारोबार में लगे हुए हैं। सारा खेल मोबाइल पर हो रहा है। जानकार लोगों की माने तो मैच शुरू होने से पहले ही शहर के बाकी जगहों से पंडरिया आए बुकी अपने-अपने ठिकानों पर पहुंच जाते हैं, और वहां से अपने लेपटॉप और मोबाइल का सेटअप जमाकर, आसानी से अपने कारोबार को बीना किसी रोकटोक के अंजाम दे रहे हैं। वैसे तो यह बुकी आमदिनों में शहर की सडक़ों पर लक्जरी कारों में घुमते है, लेकिन आईपीएल शुरू के बाद से सभी अपने-अपने ठिकानों पर जाकर बैठ कर लाखों की बोलियां लगाना शुरू करते है।
संलग्न सूत्रों की मानें तो बुकियों के द्वारा शहर भर के छोटे-बड़े करीब 30 से 40 सटोरियों को मोबाइल फोन में आईडी दे दी जाती है। जिसके बाद आईपीएल की काली दुनियां की शुरूआत होती है, अब आईपीएल का शौकिन मैच पर दाव लगाने के लिए इस आईडी में हजारों रूपए ट्रांसफर करते हैं। जिससें की वह मैच पर बोली लगा सकें। सटोरियों द्वारा आईपीएल पर दांव लगाएं जाते है, उनमें से अधिकांशतः मध्यमवर्गीय परिवार के है। खाईवाल सटोरिए काली कमाई से ऐशो आराम की जिदंगी रंगीन दुनिया की सैर सपाटे करने में मददगार नेताओं को कराते रहते हैं काला कारोबार यह धंधा हर गली मोहल्ले में धड़ल्ले से चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन काली कमाई की इस धंधे में सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष के लोगों का हाथ सना हुआ है। संरक्षण की बात पर स्थानीय प्रशासन का हाथ मिला जुला है। जिले की पुलिस प्रशासनिक महकमा को इस समय साइबर सेल को सक्रिय कर देना चाहिए ।
पुलिस अबतक जो कार्रवाई की है उसमे किसी बड़े खाईवाल सटोरिए का नाम नहीं है। खाईवाल सटोरिए अपने पाले हुए गुर्गों कार्रवाई कराकर बचे हुए हैं। इससे जुड़े हुए लोग जो व्यवस्था में चाय पानी का काम रोजी कमाने के लिए करते हैं उन पर खानापूर्ति किया जा रहा है। पुलिस थाना जो आंकड़ा आया है। इस बात को प्रमाणित करता है कि अवैध कारोबार जुआ-सट्टा-शराब धंधा जोरों पर चल रहा है। पकड़े गए नामों में एक भी सोर्स सटोरियों पर पुलिस की हाथ नहीं लगी है। खेत में टेंट लगाकर रात के अंधेरे जुआ खेलते पाए जाने का उल्लेख आया है, उसमे टेंट मालिक का नाम पता लगाना और जप्ती नहीं बताया गया है। जिससे जुआड़ीयों के सरगना के नामों का खुलासा होता। जुआ-सट्टा के खेल में स्थानीय नेताओं का संरक्षण हो सर्वविदित हो गया है।