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श्री विराग मुनिजी मसा का पारणा महोत्सव धुमधाम सकल जैन समाज ने शानदार व्यवस्था से मनाया, मसा की तपस्या अनवरत जारी।

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रायपुर - आगम ज्ञानी विद्वान तपस्वीरत्न मुनि श्रीविराग/मुनिजी म.सा.का 121 उपवास के पारणा हेतु समस्त भारत से व विश्व से भी गुरुभक्त पधारे छत्तीसगढ खरतरगच्छ जैन श्रीसंघ ने बहुत शानदार व्यवस्था की। आज प्रातःकाल 8 बजे सदर बाजार श्रीऋषभदेव मंदिर से भव्यातिभव्य वरघोङा तपस्वी मुनिराज के साथ पन्यासप्रवर आदि मुनिभगवंत प.पू.बमहतरापदविभूषिता छत्तीसगढ रत्न शिरोमणि सा. श्रीमनोहरश्रीजी म.सा.का शिष्यमंडल साध्वीजी तथा रायपुर संघ के साथ पूरे भारत के गुरुभक्तों के साथ भव्यातिभव्य वरघोङा मुख्य मार्गो से होकर दादावाङी परिसर मे आया, वहां सभी ने प्रभु परमात्मा 15 वे तीर्थंकर श्रीधर्मनाथ भगवान व दादागुरुदेव के दर्शन वंदन कर सभी पंडाल मे भव्य धर्मसभा तपस्या हेतु गुणगान व समस्त भारत से गुरुभगवंतों के आशिर्वाद वचन पत्र आये उनका वाचन हुआ, खरतरगच्छ के सभी आचार्य, उपाध्याय भगवंतों के पत्र आये। खरतरगच्छाचार्य छत्तीसगढ श्रृंगार श्रीजिनपीयूषसागर सूरिश्वरजी म.सा का पत्र वाचन खरतरगच्छ सहस्त्राब्दीवर्ष के महामंत्री सुपार्श्वजी गोलेच्छा ने वाचन किया तथा उस पत्र व संयम का चिन्ह को खरतरगवसही के ट्रस्ट मंडल व सहस्त्राब्दीवर्ष महोत्सव समिति द्वारा गणाधीश पन्यासप्रवर को अर्पित किया, खरतरगच्छाधिपति मरुधरमणि आ.श्रीजिनमणिप्रभसागर सूरिश्वरजी म.सा.का पत्र kYUP के प्रमुख ललितजी डाकलिया बैंगलोर वालो ने पठन कर खरतरगच्छ युवा परिषद के सदस्यों द्वारा पत्र व कांबली गणाधीश पंयासप्रवर पर अर्पित किया।

https://youtu.be/qXxeCgpH6A8 धर्मसभा मे तपस्वीरत्न मुनिराज के केसर छांटणा, गुरुपूजन दोनो का लाभ बढचढकर नयापारा-राजिम के बोथरा परिवार ने लिया, चावल से वधामणा आयंबिल तपस्वीरत्नों ने व कांबली को मुमुक्षुभाईयो ने तथा डाकलिया सम्पूर्ण परिवार द्वारा लाभ दिया गया, तत्पश्चात तपस्वीरत्न मुनि श्रीविरागमुनिजी म.सा. का प्रवचन बिना माईक के पूरी शांतिपूर्ण वातावरण ने सभी ने श्रवण किया। अंतिम समय मे अपनी बात रखते कहां मेरा अभिग्रह पूर्ण नही हुआ है, मेरे दिक्षादाता मेरे गुरुदेव जो मुझे जैसा कहेंगें वह "तहति" होगा। [video width="640" height="368" mp4="https://khabarchhattisgarh24.com/wp-content/uploads/2023/05/VID-20230516-WA0273.mp4"][/video]

प.पू.गणाधीश पन्यासप्रवर का प्रवचन के समय गुरु ने अपने शिष्यरत्न का शिर सहलाते शुभाशिर्वाद देते गुरुदेव की आंख गिली हो गई तथा आगम प्रमाण बातकर मुनिराज की तपस्या निरंतर चालू रहेगी, जब तक जो अभिग्रह है जिस समय जिस घर आंगण मे गोचरी लाते पूर्ण होगा, उसी घर से पारणा हो सकता है। भीष्म प्रतिज्ञा व मजबूत मन के धणी मुनिराज की जय हो पधारे सभी संघों ने विनती भी की पर गुरु आज्ञा तहति यह तपस्या आज 122 वां उपवास है, सर्व मंगल के बाद गोचरी लेने भी तपतपाति दोपहर को गये यह है।

https://youtu.be/vaUCAmA69tA "महावीर का शासन जयवंता" कुछ दिन रायपुर स्थिरता के बाद विहार भी होगा रायपुर का सौभाग्य होगा तो उनके अभिग्रह रायपुर संघ मे पूर्ण होगा तो पारणा उस परिवार के द्वारा आगे विहार मे जिस जगह पूर्णता होगी वहां पारणा हो सकता है, ऐसा मुनिराज ने अपने भाव बताये। खरतरगच्छ के 1000 साल के इतिहास मे इतनी लम्बी तपाराधना आपश्री ने की आपको खरतरगच्छाधिपति आ.श्रीजिनमणिप्रभसागर सूरिश्वरजी म.सा.ने तप चक्रवर्ती पद से विभूषित करने का पत्र भी दीया सभी गुरुभक्तों ने जय जयकार का नाद भी किया पर गुरुदेव ने पद लेना अस्वीकार किया।

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