रायपुर - एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में रविवार को साध्वी शुभंकरा श्रीजी की पावन निश्रा में मूल प्राकृत भाषा में कल्पसूत्र का श्रवण लाभ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया। इस पावन प्रसंग पर साध्वीजी ने कहा कि भद्रबाहु स्वामी रचित सूत्र शिरोमणि ‘कल्पसूत्र’ का एक-एक अक्षर मंत्राक्षर है, इसके एकाग्रचित्त होकर श्रवण से ही आत्म विशुद्धि होती है। प्रतिक्रमण करने से पहले सभी गांठ खोल दीजिए। किसी मसले को लेकर आप फोन पर घंटों बात करते है लेकिन उससे अच्छा है कि आप सीधे-सीधे संबंधित व्यक्ति से जाकर क्षमायाचना कर लीजिए। पर्युषण पर्व अपने आप को टटोलने का अवसर है। टूटे हुए दिलों को जोड़ने का पर्व है। किसी से माफी मांगनी हो तो तुरंत मांग लीजिए, आने वाली संवत्सरी पर्व का इंतजार मत कीजिए क्योंकि आपको यह नहीं पता कि आने वाले पर्व तक आप जिएंगे कि भी नहीं। आपको स्वयं के रिजल्ट का अवलोकन खुद करना है। किसी दूसरे को खुद का अध्ययन मत करने दीजिए क्योंकि आपको सबसे बेहतर जानने वाले आप खुद ही है। आपको इस चातुर्मास में आत्मषुद्धि करना है, अपने जीवन में पवित्रता लानी है। मनुष्य को अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाना है। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान पर्युषण पर्व के आठवें दिन रविवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही। साध्वीजी ने कहा कि पर्युषण पर्व के पहले हमनें 42 दिनों तक ललित विस्त्रा ग्रंथ में जीवन जीने की कला के बारे में सीखा है। उसमें हमने युवाओं को सही दिषा देने का प्रयास किया। युवाओं को कुमित्रों का त्याग करना चाहिए। उनकी संगति कभी मत करो, जिनकी संगति से जीवन बर्बाद हो जाएं। गेहूं के साथ घुन भी पीस जाता है, इसके जीते-जागते सैंकड़ों उदाहरण हम हर दिन अखबार, टीवी और मोबाइल के माध्यम से देखते-सुनते है। गलत संगत आपके जीवन, परिवार और कुल तक को बर्बाद कर सकती है। कोई भी गुरू महाराज आपको पाप की प्रेरणा नहीं देते है। यह सब तो गलत स्थान पर जाकर आप खुद ही सीख जाते हो और आपको इन सब स्थानों पर लेकर कौन जाता है, आपका कुमित्र। आज युवा व्यसन के चंगुल में ऐसे फंसते है कि पुरा का पुरा परिवार बर्बाद हो जाए। कोई ऐसा दोस्त हो जो आपको इस मुकाम तक पहुंचा सकता है तो उससे तुरंत दोस्ती तोड़ दो, उसे अपने जीवन से डिलीट कर दो। ऐसा करते समय यह बिल्कुल मत सोचना कि वह आपके बचपन का दोस्त है या पारिवारिक दोस्त है। यह मत सोचना कि अचानक से मैंने उससे दोस्ती तोड़ दी तो उसे अच्छा नहीं लगेगा। बिना मित्र जिंदगी जी लेना, आप अकेले रह सकते है। आपको जीवन में कुमित्र नहीं, कल्याण मित्र बनाना है। कल्याण मित्र की संगति आप तब कर पाओगे जब आप कुमित्रों को छोड़ोगे। साध्वीजी कहती है कि माता-पिता घर के परमात्मा होते है, भगवान से भी बढ़कर उनका स्थान है। माता-पिता जब घर में रहते तो वह घर किसी मंदिर से कम नहीं होता है। आज हम उनसे दूर होते जा रहे है। माता-पिता के चरणों में झुकने में आपको शर्म आती है और नेता-मंत्रियों को देखते ही आप उनके चरण छूते हो। आप पैसों की पूजा करते हो, जब तक माता-पिता के पास धन-संपत्ति हो तब तक आप उनकी खूब सेवा-जतन करते हो और जब उनके पास कुछ न बाकी हो तो उन्हें अकेला छोड़ देते हो। जबकि आज आपको अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए, उन्हें आपकी जरूरत है। श्रद्धालुओं ने प्रतिक्रमण कर जीवों को दिया अभयदान मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष सुषील कोचर और महासचिव नवीन भंसाली ने बताया कि संवत्सरी महापर्व के प्रसंग पर प्रातःकाल सभी श्रावक-श्राविकाओं द्वारा पौषध प्रतिक्रमण किया गया। वहीं, कल्पसूत्र के श्रवण उपरांत श्रद्धालुजन चौत्य परिपाटी रूप में जैन दादाबाड़ी से श्री ऋषभदेव मंदिर, सदरबाजार पहुंचे, जहां दर्शन-वंदन के उपरांत अपरान्ह 3.30 बजे से हजारों श्रावक-श्राविकाओं द्वारा सांवत्सरिक प्रतिक्रमण कर जगत के 84 लाख योनियों के जीवों से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप में हुई असातना के लिए क्षमायाचना कर उन्हें अभयदान दिया। 21 दिवसीय दादा गुरुदेव इक्तीसा जाप जैन दादाबाड़ी में प्रतिदिन रात्रि 8.15 से 9.15 बजे तक जारी है, जिसमें श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर पुण्यार्जन कर रहे हैं।
17 Aug 2026