डोंगरगढ़ - चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की समाधि हुए लगभग एक हफ्ता बीत चुका है। अब उनकी स्मृति केवल शेष है। हम कहते हैं उनकी स्मृति नहीं उनके द्वारा दी गई शिक्षा आज भी सार्थक परिणाम दे रही है और परिलक्षित होती दिखाई दे रही है पूज्य गुरुदेव ने जो अनुशासन बतलाया वह संघ में देखने को मिलता है। गुरुदेव की गुरुकुल परंपरा स्पष्ट दिखाई देती है। जब भक्ति आदि का समय होता है तो समस्त संघ अपनी पंक्ति के अनुसार विराजित हो जाता है। और ज्येष्ठ मुनिराज समय सागर महाराज एवं योगसागर महाराज उच्च शासन पर विराजमान रहते हैं, और गुरुदेव का चित्र समक्ष रखकर सभी संघ के मुनिराज भक्ति करते हैं।
जैसा आचार्य श्री के समय हम सभी ने देखा है। यह इस बात का परिणाम है कि आज भी गुरुदेव की दी हुई शिक्षा एवं गुरुकुल परंपरा जीवंत है।
17 Aug 2026