February 11, 2025


अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "एक सकारात्मक समाज और राष्ट्र के निर्माण की ओर" का आयोजन।

आयोजन में जर्मनी, मालदीव, श्रीलंका, कनाडा, केन्या और नेपाल सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, सामाजिक वैज्ञानिक और विचारकों ने लिया भाग।


बिलासपुर - गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के समाज कार्य विभाग द्वारा इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट और ब्रिसबेन इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेंथ-बेस्ड प्रैक्टिस, ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "एक सकारात्मक समाज और राष्ट्र के निर्माण की ओर"  का आयोजन 7- 8 फ़रवरी को किया गया है। 


इस कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र में समाज कार्य विभाग द्वारा आयोजित "स्ट्रेंथ-बेस्ड प्रैक्टिस फॉर सोशल वर्क एंड ह्यूमन सर्विसेज" पर आधारित पांच दिवसीय GIAN पाठ्यक्रम के समापन सत्र के बाद आयोजित किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन में जर्मनी, मालदीव, श्रीलंका, कनाडा, केन्या और नेपाल सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, सामाजिक वैज्ञानिक और विचारकों ने भाग लिया। 

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत कि संकल्पना में शैक्षिक संस्थानों कि भूमिका सकारात्मक समाज और राष्ट्रीय विकास हेतु योगदान पर चर्चा कर उचित प्रस्ताव प्रेषित करना था। 

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रोफेसर अमित कुमार सक्सेना ने माननीय कुलपति, प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल का प्रतिनिधित्व करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सत्र की मुख्य वक्ता प्रोफेसर रंजना सेहगल, उपाध्यक्ष, भारतीय समाज कार्य परिषद थीं। विशिष्ठ अतिथि के रूप में डॉ. डब्ल्यू. जी. प्रसन्ना कुमार, वरिष्ठ सामाजिक वैज्ञानिक, तेलंगाना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उपस्थित रहे। अन्य गणमान्य अतिथियों में प्रोफेसर ए. एस. रानाडिवे, रजिस्ट्रार, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता और प्रोफेसर आर. के. प्रधान,  अधिष्ठाता समाज विज्ञान संकाय शामिल थे। स्वागत भाषण डॉ. सस्मिता पटेल, सामाजिक कार्य विभाग की प्रमुख द्वारा दिया गया। सम्मेलन की संयोजिका डॉ. अर्चना यादव ने सम्मेलन के उद्देश्यों और महत्व पर गहन प्रकाश डाला।


सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण प्रोफेसर रंजना सेहगल का उद्घाटन व्याख्यान रहा, इसके अतिरिक्त, प्रोफेसर रंजना सेहगल द्वारा लिखित एक नई पुस्तक का विमोचन भी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। विशिष्ठ अतिथि डॉ. डब्ल्यू. जी. प्रसन्ना कुमार ने अपने उद्बोधन में युवाओं से देश के प्रति संपर्पण अपने दायित्वों के उचित निर्वहन और अपने संस्कारों से जुड़े रह कर देश के विकास में भागीदारी देने पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ. संदीप कुमार मोरिशेट्टी द्वारा आभार प्रदर्शन और उसके बाद राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। 

कार्यक्रम सम्मेलन का अगला चरण "विकसित भारत: एकात्म मानववाद – सामाजिक विज्ञान और मानविकी की भूमिका" पर डॉ. रितुपर्णा भट्टाचार्य और "राष्ट्र निर्माण में सामाजिक कार्य की भूमिका का पुनःपरिकल्पन: समकालीन समय में अवसर और चुनौतियाँ" पर गंगाभूषण एम. मोलनकल द्वारा प्लेनरी सत्र के साथ जारी रहा। इसके बाद तकनीकी सत्र और सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया।

सम्मेलन में कुल 8 तकनीकी और दो प्लीनरी सत्र का संचालन हुआ।

सत्र 1: उद्घाटन मुख्य वक्तव्य - एक पुनर्जीवित समाज के निर्माण में समाज कार्य और सामाजिक विज्ञान का महत्व

सत्र 2: समाज कार्य: सामाजिक परिवर्तन के लिए दृष्टिकोण और हस्तक्षेप

सत्र 3: असमानता को संबोधित करने और सामाजिक न्याय के निर्माण के लिए रणनीतियाँ

सत्र 4: विविध समाज में सामुदायिक सामंजस्य को संबोधित करना

सत्र 5: छात्र क्या चाहते हैं? सकारात्मक परिवर्तन के लिए युवाओं को सशक्त बनाना

सत्र 6: मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के माध्यम से मजबूत समुदायों का निर्माण

सत्र 7: सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिकों को विकसित करने की रणनीतियाँ

सत्र 8: सामाजिक कार्य और नीतियों के माध्यम से सतत विकास का निर्माण

सत्र 9: समापन पैनल - सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय ढांचे का निर्माण सम्मेलन में प्रमुख वक्ता रहे  डॉ. वी.एन. कांथा राव, मानव संसाधन सलाहकार एवं पूर्व डीन, आईएसएबीएस, नई दिल्ली, डॉ. सोजन एंटनी, अतिरिक्त प्रोफेसर, निम्हांस बेंगलुरु. टी. सुमालिनी, सहायक प्रोफेसर, विभाग शिक्षा और शिक्षा प्रौद्योगिकी, हैदराबाद विश्वविद्यालय, भारत, सुश्री सारा टंडेल, मुखलासी के सह-संस्थापक, मुंबई, भारत, श्रीमती वी. वासुदेवन, अतिरिक्त महानिदेशक, ऐवम श्री इरोन राष्ट्रीय सामाजिक विकास संस्थान, श्रीलंका, श्री सुधीर कुमार जे एस इनक्यूबेशन मैनेजर, वीईसी सेंटर फॉर, रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन, हैदराबाद, तेलंगाना, डॉ. हरिंदर मेखला, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद, तेलंगाना, सुश्री जीनत शाकिर, स्वास्थ्य विज्ञान संकाय, मालदीव नेशनल यूनिवर्सिटी, मालदीव, प्रोफेसर गंगा भूषण मोलनकल,राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर यूनिवर्सिटी, मैरी सुज़ैन बार्फस, माइकल बार्फस और श्री फ़ाहिमउद्दीन - सेकंड ब्रिज एनजीओ जर्मनी और शैंटल रोपाफादज़ो नताशा न्याशा रोरी जिम्बाब्वे से उपस्थित रहें।      

सम्मेलन में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, 50 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र पढ़ें।


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