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मै सिद्ध स्वरुपी आत्मा हूं.... जैन धर्म मे गुरु का ही महत्व बताया गुरु से लग गयी प्रीत तो दुनिया से क्या नाता मै क्या जानू।......श्री राजन् मुनि जी म सा।

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ब्यावर - आचार्य श्री रामेश के शिष्य श्री राजन मुनि जी म सा ने समता भवन मे प्रवचन के दौरान गुरु पर बताया गुरु की महत्वता क्या है? सच्चा धर्म जैन धर्म हे इसमे गुरु को महत्वपूर्ण बताया जिसने गुरु को भजनों से समझने लगे जैसे मेरी गुरु से लग गयी प्रीत दुनिया क्या जाने दुनिया क्या जाने। मुझ लग गयी धर्म की प्रीत दुनिया क्या जाने। आंखों ने देखा दिया अंजाम रह गया नाता जोड लिया उस जग की माया नगरी से रिश्ता तोड लिया। जो नाता जुड गया उसे तोडना नही उलझ लिया।

  म सा ने कहा गुरु समता के सागर है यतना पुर्वक सब सकंट दुर करने वाले मेरे गुरुवर हमदर्द है मेरे साथी है मेरी सांसे गुरु के नाम जपती रही सदियों से रास्ता अज्ञानता मे रहा जहां सच का वास्ता नही था जीवन की सच्चाई यही है जो भोतिकता मे रहना घुमना खाना पीना मौज उडाना रही, जिसके लिए तन को जाडा निचोडा वो ही छोडकर चला जायेगा। बार बार समझाये थाने समझ मे ना आये कितना खजाना था, सिकंदर के पास फिर भी खाली हाथ रहा।

  म सा ने आगे बताया दर्शन तेरा देख लिया सच से नाता जुड गया जो हमे राह दिखाई उसी ने सच्चा बौध दिया ज्ञान के दिपक के समान ज्ञान का प्रकाश दिया करते रहे। आज के लडके अपनी सपनो की राजकुमारी के पीछे सबसे लडते झगडते मां बाप को छोडकर उसके साथ रहने लगे धीरे धीरे उसकी सुंदरता का मुखौटा उतरता गया, उसके बजाय गुरु के पास रहने लगे तो तभी हम सबकुछ जान पाये गुरदेव तेरी आंखों भे समुद्र का दरिया बहता रहता है जितना आप दो उतना समझता जाता में।आपको पा लिया समझो मोक्ष पा लिया भक्ति करू तेरी और कोई चाहत नही अब मेरी।

    इससे पहले श्री हिंमाशु मुनि जी म सा ने कहा देव गुरु धर्म यह तीन तत्व जीवन मे महत्वपूर्ण है इन्हे पहचाने से सबको अपनी आत्मा के समान समझे जिसने जीव अजीव को समझ लिया समझो उसका फोकस जीव पर ही रहेगा।हमारी सोच निरन्तर यही जारी रहे मैं सिद्ध स्वरुपी आत्मा हूं।

संघ प्रवक्ता - नोरतमल बाबेल

साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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