ब्यावर - आचार्य श्री रामेश् के शिष्य श्रद्धेय श्री लाघव मुनि जी म सा ने समता भवन मे प्रवेश करने के बाद प्रवचन मे भजन से कहा रोम रोम से निकले गुरुवर नाम तुम्हारा हा नाम तुम्हारा म सा ने गुरु को चांद के समान व साधु साध्वियों को सितारे के समान बताया गया,हमारे आचार्य रामगुरुवर चंद्रमा के समान हे जो साधु साध्वियों से गिरे रहते है जैसे रात को चंद्रमा अनगिनत तारो से गिरे रहते जो सुशोभित प्रतीक होते है उसी प्रकार गुरुवर है,इनका सयंम ही तेजशीलता का है जो काले अंधेरे मे चमकते है उसी प्रकार साधु साध्वियों भी तारे के समान चमके रहते हे।जैसे हम अंधकार को छोड चांद तारे देखते हे उसी प्रकार हम गुरु को देखते है।
मसा ने बताया जब चांद के पास ध्रुव तारा चमकता उसी प्रकार उपाध्याय प्रवर चमकते है। सप्त ऋषि तारा मे आठ जिनशासन के असंख्य सितारे आकाश मे चमकते जा रहे है।पहचान बनाना है तो चांद के तारे जैसा बनो। जिस आत्मा ने गुरू का हाथ नही थामा वो सब काले अंधकार मे गुम हो गये उसके अंदर अनंत अनंत करोडो के स्वामी भी शामिल है।चमकते वो ही है जिसमे चांद का साया है अफसोस हम जिंदगी भर काले के काले अंधकार मे रह गये। गुरु से यही मांगे आप जैसी श्रद्धा हो आप जैसा स्वभाव मेरा हो जाए।
म सा ने बताया चमकना है तो गुरु से नाता जोडो तभी हम चांद सितारों की तरह चमकते रहेगे। भजन से कहा जब भी हो गुरुदेव के दर्शन समझो तीर्थ हो गया। आज व्यक्ति गुरु के दर्शन विभिन्न भावो से करता है जो खुद की समस्या के लिए गुरु से क्या मांगता रहता हूं,उनकी ताकत के अनुसार मांगना होगा।हमे ऐसी ताकत दो जो आपका हाथ मेरे सिर पर होते ही सारा कचरा बाहर निकल जाए जन्म जन्म के बंधनो से काम भोग वासना से मुक्ति मिल जाए।
इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म.सा.ने कहा जिया कब तक उलेझेगा संसार विकल्पों मे कितने भव बित गये संकल्प विकल्प में। हम इतने भीखारी हो गये अनादि काल से मांगते आ रहे है जब तक अपनी आत्मा को नही जगायगें तब तक पुरुषार्थ नही कर पायेंगे क्योंकि हम मोह को छोडने को तैयार नही समय कितना अल्प मिला महावीर का नाम लेते ही त्याग की भावना जग जानी चाहिए। सच्चा श्रावक निति से कमाता हे। आज मानव मोह के खातिर मनुष्य भव से तीरियच मे होते हुए नर्क मे पहुंच गया क्योंकि उन्हें नारद मोक्ष लेजाने को आये थे पर वह मोह को नही छुडा पाये।
संघ प्रवक्ता - नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।