राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र मूलभूत समस्या से हैरान-परेशान, प्रशासनिक अमला की रवैया गैरजिम्मेदाराना।
रामकुमार टंडन
कवर्धा - आजादी के 75 साल बाद भी कबीरधाम जिले के पंडरिया विकास खंड अंतर्गत सुदूरवनंचल पहाड़ी क्षेत्र में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बैगा आदिवासी सरकारी खोखले बयान बाजी और प्रशासनिक दावों की दंश झेल रहे अनिश्चितकालीन समय से ही रोजी रोटी शिक्षा स्वास्थ्य व्यापार,सड़क मकान सफाई व पानी की विकराल समस्या से संघर्षरत हैं।
खबर छत्तीसगढ़ ने अपने भ्रमण के दौरान पाया कि जिले के विकास खंड पंडरिया के दुरस्त सुदूरवनंचल पहाड़ी क्षेत्र ग्राम पंचायत बिरहुलडीह के आश्रित ग्रामों में शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी सड़क रोटी कपड़ा मकान सफाई व्यवस्था के लिए संघर्ष कर जीवन यापन करने मजबूर हैं।
पानी की समस्या विकराल - यहां पीने के स्वच्छ जल की आवश्यकता है, ग्रामीणजन झिरिया कुंआ से दूषित पानी पीते हैं। स्कुलिय बच्चों के लिए भी झिरिया से पानी आता है, उससे प्यास बुझती है। रात्रि में कई बार ग्रामीण पानी की कमी होने पर दूसरों के घर से उधार जल लेकर जीवन बचाते हैं।
स्लोगन भी खा रहा मात
कहते हैं ,"जल है तो कल" किन्तु यहां की हालत देखकर लगता है कि जलकी चिंता बिना कल आए बिना ही किए जाते हैं।क्या पता दूषित पानी पीने से कब कोई बीमार पड़ जाय पानी लेने को जाते समय कोई जंगली जानवर का शिकार हो काल के गाल में समा जाए।

जल जीवन मिशन यहां काम नही कर रहा - केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित योजन जल जीवन मिशन के माध्यम हर घर तक स्वच्छ पीने के जल पहुंचने की बात पर चिंता की गई है। किंतु यहां कोई काम नही दिखाई देता है। अमला इस दिशा में जिला प्रशासन के माध्यम सरकार तक जानकारी दिए हैं, की नही यह भी भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है।
ट्रेक्टर से आ रहा पीने के पानी - पंडरीपानी में 50 बिस्तर वाली बैगा आश्रम छात्रावास संचालित हैं, जहां भवन की हालत बेहद ही खराब और खतरनाक है। निर्माणाधीन बिल्डिंग वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। बिस्तरों की हालत गंभीर है। प्रशानिक अमला झांकने नही गया होगा तभी तो कोई सुध नहीं ले रहा है। झिरियाकुंआ से एक किलोमीटर दूर से ट्रेक्टर पर पानी लाया जा रहा है। इस पानी को आश्रम के बच्चे मिडिल स्कूल और अस्पताल कर्मचारी उपयोग करते हैं।

उपस्वास्थ्य केंद्र प्रभारी बेमिसाल - पंडरीपानी पंडरिया मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर स्थित है, यहां उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित है, जहां पर प्रभारी महिला कर्मी होकर भी मुख्यालय में रह कर सेवा दे रही हैं। अन्य सहित शिक्षा विभाग के कर्मी नादरत रहते हैं। मुख्यालय में कभी रात नही गुजारते हैं, अदाकदा आते जाते रहते हैं। इसलिए उप स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी महिला होने के नाते कार्य की सराहना की जानी चाहिए और इसके हकदार होने के साथ ही उन परिस्थितियों में बेमिसाल हैं।

शिक्षक नदारत - भूरभुसपानी, मजगांव में एक कमरे की स्कूल में 5 कक्षा संचालित है, शिक्षा का स्तर शाला स्वम ही बयान कर रहा है। ऊपर से जिनके कंधे पर कच्चे मिट्टी को आकार देने की जिम्मेदारी है, उन्हे सरकार वेतन के रूप में 50 से 60 हजार रूपए दे रही है, उनकी भूमिका गैरजिम्मेदराना है। क्रमशः बच्चो की दर्ज संख्या 46 और 24 है उपस्थिति 9 व 16 रहा है। भूराभूस पानी में तीन में से दो शिक्षक नदारत थे, वहीं मजगांव में 2 शिक्षक बच्चों को ही स्वयं अध्ययन करते हुए पाए गए हैं।
मिडिल स्कूल के शिक्षक 2019 से अनुपस्थित - पंडरीपानी में मिडिल स्कूल संचालित है, 68 दर्ज संख्या है, उपस्थिति 30 से 35 थी। दो शिक्षक में एक शिक्षक 2019 से ही नदारत है। अनुपस्थिति शिक्षक के संबंध में कारण अज्ञात है।

प्राथमिक शाला बंद - पंडरीपानी में आश्रमशाला व मिडिल स्कूल उप स्वास्थ्य केंद्र के पास ही प्राथमिक शाला संचालित है। जहां दो शिक्षक कार्यरत हैं, दोनो अनुपस्थित थे, विद्यालय में ताला लगा हुआ था। कोई कुछ बताने के लिए तैयार नही है, इसका सीधा सा मतलब निकलता है, आपस में मिली जुली सरकार कर्मचारियों की चल रही है। तभी तो सभी निरंकुश हैं। विभागीय जिला प्रशासन के अधिकारियों का भी सतत निरीक्षण नही हो रहा है। ग्रामीणजन व्यवस्था से हैरान परेशान हैं, शिकायत करने कई बार जिला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचते हैं, कार्यवाही भी ढाक के तीन पात के बराबर होता है। इसलिए समस्या हमेशा बनी रहती है। जिला प्रशासन सरकार मंत्री और राजनेता स्थानीय नेताओं को गंभीरतापूर्वक समस्या की ओर निदान के लिए कारगर उपाय करने की आवश्यकता है, क्योंकि कोई भी चीज असंभव नही है।