पंडरिया :- भारतीय जनता पार्टी मे कई दावेदार हैं उनमें से अधिकांश लोगों के नाम के आगे बाहरी प्रत्याशी होने का तमगा लगा हुआ है। पंडरिया विधानसभा जो भाजपा के जो प्रत्याशी जीता है, रिकार्ड खांगल कर देखा जाय तो अविभाजित मध्यप्रदेश के समय 1984 के बाद हुए चुनाव में स्थानीय एक मात्र विधायक भूपेंद्र सिंह ठाकुर का नाम आता है बाकी सभी क्षेत्रीय नही हैं। इसलिये इस विधानसभा मे वर्तमान कांग्रेस की सरकार से और उनके कारकर्ताओं व किसानों के हित मे काम हुए हैं, उससे मुकाबला करना है तो भाजपा को स्थानीय प्रत्याशी जो जमीन से जुड़ा हो तलाश करना चाहिए। अब तक आयातीत प्रत्याशियों के भरोसे अपना नाइया पार करती रही है। पंडरिया विधानसभा बहुत बड़ा है। ऊर्जावान युवा चहरा पार्टी कार्यकर्ताओं की आवश्यकता महशुस् कर रहे हैं। भाजपा अपनी नीतियों व जनमानस मे अंतिम छोर की ब्यक्ति तक बात करती है, उसे ध्यान मे रख कर प्रत्याशी तरसाने में लग जाती है तो सफलता मिल सकती है। पिछली विधानसभा में प्रत्याशी के खिलाफ कारकर्ताओं का विरोध के बावजूद प्रत्याशी बनाया गया और उसे हार समाना करना पड़ा था। हालांकि 15 साल की सरकार के खिलाफ भी लोगों में नाराजगी भी अधिक थी। इस बार कैंडिडेट भाजपा को सोंच समझकर क्षेत्रीय चेहरा मैदान में उतरना होगा। अब जिला पंचायत सदस्य, जनपद पंचायत सदस्य, एवं सरपंच जिन्हे भाजपा की पलासी के अनुरूप माना जा सकता है। ऐसा नाम अंधियारखोर के सरपंच जो पंचायती राज लागु होने के बाद से लगातार प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। सरपंच परिवार का परिवारिक पृष्ठभूमि भी बहुत अच्छा है, पंचायतों के चुनाव में एक बार नही बार बार लोग उन्हे मौका दे रहे हैं, मतलब जानता उन्हे बड़े पद पर बैठना चाहती है। वर्तमान सरकार की गौठान योजना एक सफल योजना कही जा सकती है। इस पंचायत में तो मॉडल बन गया है। जिले के सभी अधिकारी कार्य को देखने आते हैं। पिछले कार्यकाल में सरपंच संघ का अध्यक्ष भी अंधीरखोर् का सरपंच रहा है। पंडरिया जनपद की बात की जाय जिले में सर्वाधिक 140 ग्राम पंचायत हैं सभी पार्टी के प्रतिनिधियों से अच्छा तालमेल है। भारतीय जनता पार्टी युवा चेहरा सौम्य सरल मिलनसार व्यक्तित्व के धनी सरपंच प्रदीपपुरी गोस्वामी अंधियारखोर को आजमाना चाहती है, तो पंडरिया विधानसभा 71 के लिए सम्पर्क कर नाम को आगे बढ़ा सकती है।