वरिष्ठ पत्रकार रामकुमार टंडन की रिपोर्ट - पंडरिया :- विधानसभा चुनाव के तारीख जैसे जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, प्रत्याशी के रूप में टिकट मांगने वाले नेताओं की संख्या भी कम हो गई है। पंडरिया विधानसभा की बात की जाय तो कांग्रेस पार्टी में सर्वाधिक दावेदार रहे हैं, वहीं भाजपा में भी दावेदारों की कमी नही रही है। कुछ तो पहुँच पैसा सोहरत के दम पर अपनी टिकट पक्की मान रहे थे, और क्षेत्र में दौरा भी उसी के हिसाब से कर रहे थे। पैनल में नाम आने के बाद से दोनो पार्टी में जोर अजमाइस का खेल जारी है। कांग्रेस भाजपा दोनो दल के नेताओं में अटकलो का बाजार गर्म है, कांग्रेस से नीलकंठ चंद्रवंशी, श्रीमती ममता चंद्राकर, महेश चंद्रवंशी का नाम लिया जा रहा है, तो वहीं भाजपा से आरएसएस से जुड़े हुए स्थानीय विशेषर पटेल का नाम लिया जा रहा है। इस बात की जानकारी कुछ चैनलों के माध्यम भाजपा से संभावित प्रत्याशी विशेषर पटेल के रूप में नाम समाने आने के बाद से सशक्त दावेदार जिलापंचायत सदस्य श्रीमती भावना बोहरा के समर्थकों में मायूसी छा गई है, चारों तरफ सन्नाटा हो गया है। सूत्रों के माध्यम जो बाते समाने आ रही हैं, उसे सच माना जाय तो मैडम बोहरा दिल्ली में जाकर अपनी पक्ष रख रही है व दबाव बना रही हैं। श्रीमती भावना बोहरा रायपुर की रहने वाली हैं, छत्तीसगढ़ के करपोरेट घराने से तालुख रखती है। रुपये की कोई कमी नही है। बाहरी प्रत्याशी होने के बाद भी जिला पंचायत चुनाव सरलता से जीती हैं, भावना सेवा संस्थान के नाम पर एक संस्थान चलाती हैं, जिसके माध्यम जिले में बड़े पैमाने पर लोगों के जरूरत के समान उपहार स्वरूप बांटती हैं, स्वास्थगत कठिनाइयों को ध्यान में रखकर एम्बुलेश भी चलाती हैं, जिससे बहुत ही कम समय में अपना पहचान बना चुकी हैं। जानकार नेताओं की माने तो पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के रिश्तेदार होना बोहरा को बताते हैं। सायद इस नाम से भी वजनदार मान रहें हैं। हालांकि राजनीति में रूपया पैसा कोई बहुत ज्यादा मायने नही रखती है। ऐसा होता तो प्रधानमंत्री के खुर्शी पर रूपया पैसे वाले ही बैठते इसलिय भ्रम को पालकर रखना ठीक नही है, फ़िर भी रुपये पैसे के बिना चुनाव जीतना आसान नही है। एक कहावत को सच मान लेना चाहिए। बाप चिन्हय न भाईया सबसे बड़ा रूपैया। विशेषर पटेल एक सामान्य कृषक परिवार से तालुक रखता है। शिक्षक होने के नाते सहज सरल रहे है, लोगों के बिच पॉपुलर नही हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आने के बाद से पहचान कार्यकर्ता के बिच बनाये हैं। विशेषर पटेल को भाजपा प्रत्याशी बनती है, तो कांग्रेस के दावेदार चुनाव में बहुत ज्यादा दिक्कत नही आने की बात कहकर प्रसन्नचित हैं। जबकी ये बहुत बड़ी भूल है। भावना बोहरा को कुछ लोग स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में सामने आने की बात कह रहे हैं यह बता सच निकलती है तो पंडरिया विधानसभा चुनाव बड़े ही दिलचस्प हो सकती है। तीसरी शक्ति के नाम से पहचान क्षेत्र मे बनाने वाली पार्टी बहुजन समाज पार्टी का गोड़वाना गणतंत्र पार्टी से गठबंधन हो चुका है। आदिवासियों के बिच गोंगपा का क्षेत्र में अपना बहुत बड़ा जनाधार है। ऐसे में चुनावी समीकरण बहुत ही दिलचस्प हो सकती है। क्षेत्र में जाति समीकरण को आधार मानकर चुनाव लड़ने वालों का तिलश्म भी दूटा है। मोहमद अकबर भाई भी पंडरिया विधानसभा से विधायक रहे हैं। वर्त्तमान विधायक श्रीमती ममता चंद्राकर पांच साल से क्षेत्र की विधायक हैं, किन्तु कामकाज की दृष्टि कोई विशेष पहचान बनाने में नाकाम रही है, कोई उपलब्धि सत्ता पक्ष के विधायक होने का लाभ जनता को नही मिला है। क्षेत्र में कम कवर्धा में निवास कार्यालय बनाकर रह रही हैं। विवाद के घेरे में कई बार नाम आया है। संगठन या राजीव गांधी खेल, सहकारी चुनाव व भर्ती में अंधा बांटे रेवड़ी के तर्ज पर लाभ हानी को देखकर काम हुआ है, क्षेत्र के एक बहुत बड़ा वर्ग असहज महसूस करते रहे हैं। बाउजूद दोबारा प्रत्याशी बनाने की बात कांग्रेस करती है, तो उसके लिए आत्मघाती कदम हो सकती है।